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जम्मू और कश्मीर
न्यायिक शिक्षा और पेशेवर अनुशासन पर Justice Nargal का बयान
Ratna Netam
4 April 2026 4:18 PM IST

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JAMMU.जम्मू: सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस नरगल ने जम्मू में आयोजित एक कानून और न्याय शिक्षा सम्मेलन में कहा कि लॉ सिर्फ एक पेशा नहीं है, बल्कि इसके लिए पक्का अनुशासन और नैतिक प्रतिबद्धता होना अनिवार्य है। जस्टिस नरगल ने छात्रों और युवा वकीलों को बताया कि केवल तकनीकी ज्ञान या डिग्री से कानून के क्षेत्र में सफलता नहीं मिलती, बल्कि अनुशासन और पेशेवर मूल्यों के पालन से ही उत्कृष्टता हासिल होती है।
जस्टिस नरगल ने कहा कि कानून के पेशे में कार्यरत हर व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है कि वह समाज और न्याय के उच्च मानकों को बनाए रखे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुशासन केवल समय की पाबंदी या नियमों का पालन नहीं है, बल्कि न्याय और ईमानदारी के मूल्यों का सम्मान भी है। उनके अनुसार, अनुशासन का अभाव पेशेवर जिम्मेदारी और समाज में न्याय के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि लगातार अध्ययन, केस स्टडी और व्यावहारिक अनुभव ही उन्हें कानून के क्षेत्र में निपुण बनाएगा। जस्टिस नरगल ने यह भी बताया कि न्यायपालिका में अनुशासन का मतलब सिर्फ़ कानून लागू करना नहीं है, बल्कि निष्पक्षता, समानता और समाज के प्रति जवाबदेही भी शामिल है। उन्होंने कहा कि अनुशासन ही न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता और समाज में भरोसे को बनाए रखने का आधार है।
जस्टिस नरगल ने यह स्पष्ट किया कि कानून के क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं। डिजिटल तकनीक, ई-कोर्टिंग और नए कानूनी सुधारों के बीच, अनुशासन और प्रतिबद्धता ही उन वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को सफलता दिला सकती है, जो समाज को न्याय प्रदान करना चाहते हैं।
उन्होंने युवाओं को यह संदेश भी दिया कि नैतिकता, प्रतिबद्धता और पेशेवर अनुशासन कानून की पढ़ाई और अभ्यास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि यही गुण उन्हें एक जिम्मेदार और सक्षम पेशेवर बनाने में मदद करेंगे।
सम्मेलन में शामिल छात्रों और स्थानीय वकीलों ने जस्टिस नरगल के विचारों की सराहना की और कहा कि उनके अनुभव और सुझाव कानून के पेशे में अनुशासन और नैतिक मूल्यों को समझने में सहायक होंगे।
कुल मिलाकर, जस्टिस नरगल का यह संदेश जम्मू के कानून छात्रों और पेशेवरों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लॉ केवल पेशा नहीं है, बल्कि समाज और न्याय के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक मिशन है, जिसके लिए अनुशासन और प्रतिबद्धता सर्वोपरि हैं।
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