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उमर अब्दुल्ला की पार्टी में बगावत के सुर, विधायकों की गुप्त बैठक

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के बाद अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई वरिष्ठ विधायकों में मंत्री पद नहीं मिलने और संगठन में कथित उपेक्षा को लेकर नाराजगी बढ़ने की खबर है। इसी बीच शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक लोलाब विधानसभा क्षेत्र से विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर आयोजित की गई। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल और अनंतनाग पश्चिम के विधायक अब्दुल मजीद लर्मी सहित कई विधायक शामिल हुए। इस घटनाक्रम के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर संभावित गुटबाजी और नेतृत्व के खिलाफ बढ़ते असंतोष को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 27 अक्टूबर को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल किया था। इस दौरान चार नए मंत्रियों को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया। हालांकि, कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्री पद नहीं मिलने से पार्टी के भीतर असंतोष सामने आया।
बताया जा रहा है कि कुछ विधायकों को उम्मीद थी कि मंत्रिमंडल विस्तार में उनके अनुभव और वरिष्ठता को महत्व दिया जाएगा, लेकिन नए मंत्रियों के चयन के बाद उनकी उम्मीदों को झटका लगा।
इसके बाद कई विधायकों ने आपसी बातचीत शुरू की और आगे की रणनीति को लेकर श्रीनगर में बैठक आयोजित की।
बैठक में 17 से 19 विधायकों के शामिल होने की खबर
विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में बैठक में शामिल विधायकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में 17, कुछ में 18 और अन्य में 19 विधायकों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों के साथ सरकार का समर्थन कर रहे एक निर्दलीय विधायक की उपस्थिति की भी जानकारी सामने आई है।
बैठक में कैसर जमशेद लोन, मुबारक गुल, अब्दुल मजीद लर्मी और नजीर अहमद गुरेजी जैसे वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, विधायकों ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उत्पन्न परिस्थितियों और पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर चर्चा की।
वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी से बढ़ी नाराजगी
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष का प्रमुख कारण मंत्रिमंडल में वरिष्ठ विधायकों को जगह नहीं मिलना बताया जा रहा है।
अब्दुल मजीद लर्मी उन नेताओं में शामिल हैं, जिनके मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही थी। हालांकि, उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया।
इसी प्रकार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल को भी मंत्रिपरिषद में स्थान नहीं मिला।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। इसके बाद पार्टी के भीतर मतभेदों की चर्चा तेज होने लगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाओं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाना किसी भी सत्तारूढ़ दल के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होता है।
मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगियों पर भी सवाल
सूत्रों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, नाराज विधायकों ने पार्टी और सरकार के कुछ फैसलों में सीमित लोगों के प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है।
असंतुष्ट विधायकों की ओर से मंत्रिमंडल में व्यापक बदलाव और मुख्यमंत्री के कुछ करीबी सहयोगियों की भूमिका की समीक्षा की मांग किए जाने की खबर है।
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने अपनी शिकायतें रखने का निर्णय लिया है।
इसके साथ ही पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक सामूहिक बनाने और वरिष्ठ विधायकों को महत्व देने की मांग भी उठाई गई है।
हालांकि, इन मांगों पर पार्टी नेतृत्व की अंतिम प्रतिक्रिया और किसी औपचारिक निर्णय की पुष्टि होना बाकी है।
15 दिनों के भीतर समाधान की मांग
रिपोर्टों के अनुसार, असंतुष्ट विधायकों ने अपनी शिकायतों के समाधान के लिए पार्टी नेतृत्व को 15 दिनों का समय देने की बात कही है।
बताया जा रहा है कि बैठक में एकतरफा फैसलों और पार्टी के भीतर कथित गुट विशेष के प्रभाव को लेकर असंतोष व्यक्त किया गया।
विधायकों का मानना है कि संगठन में सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों की राय को महत्व मिलना चाहिए।
हालांकि, बैठक में हुई चर्चा और कथित अल्टीमेटम के संबंध में सभी उपस्थित विधायकों की ओर से एक समान सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
नजीर गुरेजी ने बताया सामान्य मुलाकात
इस पूरे घटनाक्रम के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता नजीर अहमद गुरेजी ने बैठक को लेकर अलग प्रतिक्रिया दी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने इसे एक सामान्य मित्रतापूर्ण मुलाकात बताया और कहा कि विधायकों के एक साथ मिलने को राजनीतिक विद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उनके इस बयान से स्पष्ट है कि बैठक में शामिल सभी नेताओं की ओर से सार्वजनिक रूप से बगावत की पुष्टि नहीं की गई है।
इसके बावजूद मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद कई विधायकों का एक स्थान पर जुटना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ी चुनौती
जम्मू-कश्मीर में अक्टूबर 2024 में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार लंबे समय से प्रतीक्षित था।
हालिया विस्तार के दौरान अली मोहम्मद सागर, शमीमा फिरदौस, मीर सैफुल्लाह और अल्ताफ कालू को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया।
इसके बाद मंत्रियों के विभागों का पुनर्वितरण भी किया गया।
जम्मू-कश्मीर में मंत्रिपरिषद के आकार पर कानूनी सीमा लागू होने के कारण सभी इच्छुक विधायकों को मंत्री पद देना संभव नहीं है।
ऐसे में नेतृत्व के सामने वरिष्ठता, क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच सामंजस्य बनाने की चुनौती है।
क्या उमर सरकार पर मंडरा रहा संकट?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या इसका असर उमर अब्दुल्ला सरकार की स्थिरता पर पड़ेगा।
हालांकि, फिलहाल असंतुष्ट विधायकों की बैठक को सरकार से समर्थन वापस लेने के फैसले के रूप में नहीं देखा जा सकता।
विधायकों ने अभी तक सामूहिक रूप से सरकार से समर्थन वापसी या पार्टी छोड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को पार्टी के भीतर संगठनात्मक असंतोष और मंत्रिमंडल विस्तार से उपजी नाराजगी के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
फारूक और उमर अब्दुल्ला के सामने बड़ी चुनौती
अब नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने नाराज विधायकों को संतुष्ट करने की चुनौती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व यदि असंतुष्ट विधायकों से संवाद स्थापित करता है, तो आंतरिक मतभेदों को दूर करने में मदद मिल सकती है।
दूसरी ओर, नाराजगी लंबे समय तक बनी रहने से संगठनात्मक गतिविधियां और सरकार के भीतर समन्वय प्रभावित हो सकता है।
फिलहाल श्रीनगर में हुई बैठक के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट विधायकों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।





