जम्मू और कश्मीर

सीमा पर सुरक्षाबल अलर्ट घुसपैठ की 7 कोशिशों को किया नाकाम

nidhi
3 Sept 2026 9:36 AM IST
सीमा पर सुरक्षाबल अलर्ट घुसपैठ की 7 कोशिशों को किया नाकाम
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7 कोशिशें नाकाम बॉर्डर इलाकों में हाई अलर्ट

जम्मू: जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की कोशिशों के खिलाफ सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया है। इस साल अब तक अलग-अलग सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ की सात कोशिशें नाकाम की जा चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद संवेदनशील इलाकों में सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस लगातार निगरानी और गश्त बढ़ाए हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक घुसपैठ की कोशिशें सांबा, सुंदरबनी, भींबर गली, नौशेरा, उरी, पुंछ और राजौरी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में सामने आई हैं। इन कोशिशों के दौरान कई आतंकियों और घुसपैठियों को मार गिराया गया है। सीमा पर लगातार सामने आ रही गतिविधियों को देखते हुए जवानों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

सांबा में मारा गया था पाकिस्तानी घुसपैठिया
इस साल की शुरुआती प्रमुख घटनाओं में 25 जनवरी को सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की कोशिश कर रहे एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। इसके बाद LoC के अलग-अलग हिस्सों में भी संदिग्ध गतिविधियां सामने आती रहीं। सुरक्षाबलों ने समय रहते कार्रवाई करते हुए घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया।
राजौरी में हाल ही में हुई घुसपैठ की कोशिश
अगस्त के अंतिम सप्ताह में राजौरी के नौशेरा सेक्टर में भी घुसपैठ की कोशिश सामने आई। रूमीधारा क्षेत्र में तैनात जवानों ने LoC के पास संदिग्ध गतिविधि देखी थी। जवानों ने संदिग्धों को चुनौती दी तो दूसरी तरफ से गोलीबारी की गई। भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद घुसपैठ की कोशिश कर रहे संदिग्ध वापस भाग गए। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त जवानों की तैनाती के साथ तलाशी अभियान चलाया गया।
ड्रोन गतिविधियां भी बढ़ा रहीं चिंता
सीमा पर केवल जमीन के रास्ते घुसपैठ ही चुनौती नहीं है। हाल के दिनों में संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन की गतिविधियां भी सामने आई हैं। पुंछ क्षेत्र में LoC के पास पाकिस्तानी दिशा से आए एक ड्रोन को भारतीय सीमा की ओर बढ़ते देखा गया था। सुरक्षाबलों की सतर्कता के बाद ड्रोन वापस लौट गया। इस तरह की घटनाओं के कारण संवेदनशील क्षेत्रों में एंटी-ड्रोन निगरानी को भी मजबूत किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका रहती है कि ड्रोन का इस्तेमाल सीमा पार से हथियार, गोला-बारूद या नशीले पदार्थ गिराने के लिए किया जा सकता है।
चौबीसों घंटे हो रही सीमा की निगरानी
घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए सेना और BSF संवेदनशील इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं। गश्त बढ़ाने के साथ उन रास्तों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिनका इस्तेमाल पहले घुसपैठ के लिए किया गया है। पहाड़ी और जंगली इलाकों में जवानों के लिए निगरानी चुनौतीपूर्ण होती है। इसके बावजूद आधुनिक निगरानी उपकरणों और जमीनी गश्त के जरिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
सेना BSF और पुलिस के बीच तालमेल
सीमावर्ती सुरक्षा व्यवस्था में सेना और BSF के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सीमा पार करने की कोशिश नाकाम होने के बाद आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई घुसपैठिया भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने में सफल तो नहीं हुआ। संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई करती हैं। सीमावर्ती गांवों और जंगलों के आसपास भी निगरानी रखी जा रही है।
सुरक्षा समीक्षा में भी सतर्कता बढ़ाने पर जोर
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हाल में उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ लगातार दबाव बनाए रखने और एरिया डोमिनेशन ऑपरेशन तेज करने के निर्देश दिए हैं। नार्को-टेरर नेटवर्क और दूसरे उभरते सुरक्षा खतरों के खिलाफ भी कार्रवाई मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
बॉर्डर इलाकों में कड़ा सुरक्षा घेरा
लगातार घुसपैठ की कोशिशों और संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों के कारण LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनी हुई है। जवान नियमित गश्त के साथ रात में भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। इस साल अब तक सात घुसपैठ की कोशिशों का नाकाम होना बताता है कि सीमा पार से प्रवेश की चुनौती लगातार बनी हुई है। ऐसे में सेना, BSF और पुलिस ने सीमा से लेकर अंदरूनी इलाकों तक सुरक्षा तंत्र को सक्रिय रखा है। सुरक्षाबलों का जोर किसी भी घुसपैठ की कोशिश का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाकर उसे विफल करने पर है।
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