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जम्मू-कश्मीर में 50 हजार प्रवासी परिवारों को NFSA डेटाबेस से जोड़ने की तैयारी

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्रवासी परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार करीब 50 हजार प्रवासी परिवारों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के डेटाबेस में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य प्रवासी परिवारों को केवल खाद्य सुरक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यापक सामाजिक कल्याण योजनाओं से जोड़ना है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह अभियान राहत और पुनर्वास संगठन (Relief and Rehabilitation Organisation) की ओर से खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग तथा समाज कल्याण विभाग के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रवासी परिवारों का सत्यापन, डेटा अपडेट और उन्हें सरकारी योजनाओं के दायरे में लाने का काम किया जा रहा है।
प्रवक्ता के अनुसार, सरकार की नीति के तहत प्रवासी राशन कार्ड को अब केवल खाद्यान्न प्राप्त करने के दस्तावेज के रूप में नहीं देखा जाएगा, बल्कि इसे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच का माध्यम बनाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया से किसी भी प्रवासी परिवार के मौजूदा अधिकारों, मान्यता प्राप्त प्रवासी दर्जे या पहले से मिल रही राहत सुविधाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि NFSA डेटाबेस में शामिल होने के बाद प्रवासी परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में आसानी होगी। इससे पेंशन, चिकित्सा सुविधाओं और आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं तक उनकी पहुंच बेहतर हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, पहले कई परिवारों को दस्तावेजी प्रक्रियाओं और अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
इस अभियान के तहत प्रशासन की ओर से घर-घर जाकर संपर्क किया जा रहा है। प्रवासी परिवारों को ई-KYC की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उनकी पहचान और रिकॉर्ड को डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जा सके। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 3,000 से अधिक प्रवासी परिवारों को इस प्रक्रिया में सहायता दी जा चुकी है।
प्रवक्ता ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सभी पात्र प्रवासी परिवारों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए। इसके लिए जमीनी स्तर पर विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। प्रशासनिक टीमें परिवारों की समस्याओं को समझकर उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, NFSA डेटाबेस में शामिल होने से प्रवासी परिवारों की जानकारी एकीकृत प्रणाली में उपलब्ध होगी। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने में तेजी आएगी।
सरकार का यह कदम खासतौर पर उन प्रवासी परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय से विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं पर निर्भर हैं। प्रशासन का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ाव बढ़ने से इन परिवारों को आर्थिक स्थिरता और बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
प्रवासी परिवारों के लिए राहत और पुनर्वास से जुड़ी योजनाएं जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से संचालित की जा रही हैं। सरकार समय-समय पर इन परिवारों की जरूरतों के अनुसार योजनाओं में सुधार करती रही है। इस नई पहल के माध्यम से प्रशासन का प्रयास है कि राहत व्यवस्था को आधुनिक डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाए और लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी डेटाबेस में प्रवासी परिवारों का समावेश सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बेहतर प्रबंधन में मदद करेगा। इससे नीति निर्माण में भी सहायता मिलेगी, क्योंकि सरकार के पास लाभार्थियों से जुड़ी अधिक सटीक जानकारी उपलब्ध होगी।
अधिकारियों ने बताया कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और अधिक से अधिक परिवारों को NFSA डेटाबेस से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन की कोशिश है कि कोई भी पात्र प्रवासी परिवार सरकारी सहायता से वंचित न रहे।
जम्मू-कश्मीर सरकार की यह पहल प्रवासी समुदायों को सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दायरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया से प्रवासी परिवारों को खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, पेंशन और आर्थिक सहायता जैसी सुविधाओं का लाभ अधिक आसानी और प्रभावी तरीके से मिल सकेगा।





