जम्मू और कश्मीर

कारोबार और GST नियमों में बदलाव की तैयारी

Kavita2
19 Sept 2026 1:54 PM IST
कारोबार और GST नियमों में बदलाव की तैयारी
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र 21 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। 30 सितंबर तक चलने वाले इस सत्र में सात बैठकें प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार तीन महत्वपूर्ण सुधार विधेयकों को विधानसभा के सामने रखने की तैयारी कर रही है। इनमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी कारोबार करने की प्रक्रिया आसान बनाने से संबंधित प्रस्तावित कानून, जम्मू-कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026 और जम्मू-कश्मीर नगर पालिका (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं।

तीनों प्रस्तावों का संबंध अलग-अलग क्षेत्रों से है, लेकिन इनका व्यापक उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल करना, टैक्स व्यवस्था को केंद्रीय कानून के साथ अधिक समरूप बनाना और शहरी स्थानीय निकायों की व्यवस्था को स्पष्ट करना है। सरकार का कारोबार संबंधी प्रस्ताव निवेशकों और उद्यमियों को विभिन्न विभागीय मंजूरियों में लगने वाले समय को कम करने पर केंद्रित है।

21 से 30 सितंबर तक चलेगा सत्र

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र श्रीनगर में 21 सितंबर से शुरू होगा और 30 सितंबर तक चलेगा। आधिकारिक विधानसभा पोर्टल पर भी इस अवधि का सत्र कैलेंडर दर्ज है। कुल सात बैठकें निर्धारित हैं। सत्र में सरकारी विधायी कार्य के अलावा सदस्यों के सवाल और अन्य संसदीय कार्य भी होंगे।

सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने ऑल पार्टी और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक कर सदन के सुचारु संचालन पर चर्चा की है। उन्होंने जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा और विधायकों को अपने क्षेत्रों के विषय उठाने के लिए पर्याप्त अवसर देने पर जोर दिया।

कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान करने पर जोर

सरकार के विधायी एजेंडे में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित प्रस्ताव खास महत्व रखता है। इसके तहत कारोबार शुरू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को सरल करने, अलग-अलग विभागों से ली जाने वाली मंजूरियों और अनापत्ति प्रमाणपत्रों की संख्या को यथासंभव कम करने तथा प्रक्रियागत देरी घटाने की तैयारी है।

प्रस्तावित व्यवस्था में स्व-प्रमाणन जैसे उपायों को बढ़ावा देने पर भी विचार किया गया है। उद्देश्य यह है कि कोई नया उद्यम केवल लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण शुरू होने में अनावश्यक देरी का सामना न करे। हालांकि अंतिम प्रावधान वही होंगे जो विधेयक के स्वीकृत पाठ और विधानसभा की प्रक्रिया के बाद लागू होंगे।

तीन साल की मोहलत का प्रस्ताव

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े प्रस्ताव में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था कुछ पात्र व्यवसायों को निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करने के लिए तीन साल तक का समय देने की हो सकती है।

इसका आशय यह है कि पात्र प्रतिष्ठानों को कुछ मामलों में कारोबार शुरू करने के समय ही सभी औपचारिकताओं के पूरा होने का इंतजार न करना पड़े और शेष निर्धारित आवश्यकताओं को तय समयसीमा में पूरा करने का अवसर मिले। यह व्यवस्था वैधानिक और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के अधीन होगी।

रिपोर्टों के अनुसार इस तरह के सुधारों का प्रभाव होटल, होमस्टे, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य पात्र व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसका विस्तृत दायरा विधेयक के अंतिम प्रावधानों से स्पष्ट होगा।

निरीक्षण प्रक्रिया में भी बदलाव की तैयारी

सरकार विभागीय निरीक्षण की प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध और जवाबदेह बनाने के उपायों पर भी विचार कर रही है। प्रस्तावित ढांचे में जहां लागू हो, निरीक्षण के बाद संबंधित विभागों द्वारा रिपोर्ट तेजी से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार कुछ परिस्थितियों में निरीक्षण रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। इसका उद्देश्य उद्यमियों को निरीक्षण रिपोर्ट के लिए लंबे समय तक इंतजार करने से बचाना और नियामकीय प्रक्रिया को अधिक अनुमानित बनाना है।

GST कानून में होगा संशोधन

सरकार का दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम 2017 में संशोधन से संबंधित है।

प्रस्तावित जम्मू-कश्मीर GST संशोधन विधेयक 2026 का उद्देश्य केंद्र के GST कानून में वित्त अधिनियम 2026 के जरिए किए गए बदलावों के अनुरूप केंद्र-शासित प्रदेश के टैक्स ढांचे को अधिक समरूप बनाना है। रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर GST कानून की कई धाराओं में बदलाव प्रस्तावित हैं।

सरकार का तर्क है कि केंद्रीय और जम्मू-कश्मीर GST व्यवस्था में अधिक समानता होने से करदाताओं और कारोबारियों के लिए अनुपालन की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकती है। इससे कानून की अलग-अलग व्याख्या से पैदा होने वाले विवादों को कम करने और टैक्स अनुपालन में आसानी लाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पास वित्त विभाग भी है और GST संशोधन प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया इसी विभाग से जुड़ी है।

नगर पालिका कानून में भी बदलाव

तीसरा प्रमुख विधेयक जम्मू-कश्मीर नगर पालिका अधिनियम 2000 में संशोधन से जुड़ा है। प्रस्तावित जम्मू-कश्मीर नगर पालिका (संशोधन) विधेयक 2026 का उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों की संरचना और चुनाव संबंधी व्यवस्था में मौजूद कुछ कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों को संबोधित करना है।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नगर पालिका कानून और चुनाव नियमों में कुछ बदलाव की जरूरत बताई गई थी। प्रस्तावित संशोधन में शहरी स्थानीय निकायों की संरचना, जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व और नगर निकाय चुनावों से जुड़ी जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट करने की दिशा में प्रावधान किए जाने की संभावना है।

वार्ड परिसीमन और चुनावी जिम्मेदारियां

नगर पालिका संशोधन में वार्ड परिसीमन और चुनाव प्रबंधन से जुड़े अधिकारों तथा जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने पर भी ध्यान दिया जा सकता है।

इसका उद्देश्य राज्य निर्वाचन आयोग और स्थानीय प्रशासन सहित विभिन्न संस्थाओं के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना और अधिकार क्षेत्र के संभावित दोहराव को कम करना है। सरकार का कहना है कि इससे शहरी स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली और भविष्य में होने वाली चुनावी प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट कानूनी आधार मिल सकता है।

निवेश और रोजगार से भी जुड़ा सवाल

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित सुधारों का सीधा संबंध निवेश के माहौल से है। किसी नए उद्योग या व्यावसायिक प्रतिष्ठान को स्थापित करने में यदि बड़ी संख्या में मंजूरियां और लंबी प्रक्रियाएं हों तो परियोजना शुरू होने में समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं।

प्रस्तावित कानून इसी प्रक्रियागत बोझ को कम करने का प्रयास करता है। हालांकि इससे वास्तव में निवेश या रोजगार में कितनी वृद्धि होगी, इसका आकलन कानून लागू होने और उसके परिणाम सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

विधानसभा में होगी चर्चा

ये तीनों प्रस्ताव विधानसभा की विधायी प्रक्रिया से गुजरेंगे। विधेयक पेश होने के बाद सदस्य इनके प्रावधानों पर चर्चा कर सकेंगे और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे निर्णय होगा।

ऐसे में अभी प्रस्तावित प्रावधानों को अंतिम कानून नहीं माना जाना चाहिए। विधानसभा में पेश होने वाले विधेयकों के वास्तविक पाठ से ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि कारोबारियों को कौन-कौन सी छूट मिलेगी, GST में किन बदलावों को अंतिम रूप दिया गया है और नगर निकायों की व्यवस्था में वास्तव में क्या परिवर्तन होगा।

21 सितंबर से शुरू होने वाला शरदकालीन सत्र इस लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा कि इसमें सरकार प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों से जुड़े इन प्रस्तावों को सदन के सामने रखेगी। कारोबार की प्रक्रियाओं को आसान बनाने से लेकर GST व्यवस्था में बदलाव और नगर निकाय प्रशासन तक, तीनों विधेयकों पर होने वाली चर्चा से जम्मू-कश्मीर के नियामकीय और प्रशासनिक ढांचे की आगे की दिशा अधिक स्पष्ट होगी।

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