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कुदरत की मार से बागवानी बेहाल, सेब और आम की पैदावार पर असर

nidhi
19 Sept 2026 11:36 AM IST
कुदरत की मार से बागवानी बेहाल, सेब और आम की पैदावार पर असर
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बागवानों की बढ़ी चिंता

जम्मू-कश्मीर : बागवानी पर बदलते मौसम का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। कश्मीर की पहचान माने जाने वाले सेब और जम्मू संभाग के प्रमुख फलों में शामिल आम की खेती मौसम में हो रहे लगातार बदलावों से प्रभावित हो रही है। तापमान में असामान्य उतार-चढ़ाव, बारिश के बदलते पैटर्न और मौसम की अनिश्चितता ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है।

कश्मीर घाटी में सेब की खेती बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका का आधार है। यहां मौसम की परिस्थितियां सेब के पेड़ों में फूल आने से लेकर फल तैयार होने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से मौसम के मिजाज में बदलाव के कारण बागवानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। तापमान में अचानक बढ़ोतरी या गिरावट, बेमौसम बारिश और अन्य मौसमी परिस्थितियां फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।
सेब की फसल के लिए सही समय पर ठंड, पर्याप्त नमी और अनुकूल तापमान जरूरी होता है। मौसम में बदलाव होने पर पेड़ों के प्राकृतिक चक्र पर असर पड़ सकता है। इससे फूल आने, फल बनने और फल के आकार तथा गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसके अलावा बारिश और नमी में बदलाव से बागों में रोग और कीटों का खतरा भी बढ़ सकता है।
दूसरी ओर जम्मू संभाग में आम की बागवानी भी मौसम की मार झेल रही है। आम के पेड़ों पर फूल आने और फल विकसित होने के दौरान तापमान तथा बारिश का विशेष महत्व होता है। यदि मौसम अचानक बदलता है तो फूल झड़ने, फल बनने में कमी आने और तैयार फलों की गुणवत्ता प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
बागवानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मौसम का अनुमान पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। खेती पूरी तरह प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर होने के कारण अचानक होने वाले बदलावों से नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है। छोटे और सीमांत बागवानों के लिए यह चुनौती और गंभीर हो सकती है, क्योंकि फसल खराब होने की स्थिति में उनकी आय सीधे प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार बदलते मौसम के बीच बागवानों को आधुनिक तकनीकों, मौसम आधारित सलाह और वैज्ञानिक प्रबंधन को अपनाने की जरूरत है। सिंचाई व्यवस्था, मिट्टी की नमी का प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर कृषि गतिविधियों की योजना बनाना नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है।
कश्मीर का सेब और जम्मू का आम केवल किसानों की आय का साधन नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पहचान से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में बदलते मौसम से बागवानी पर बढ़ता दबाव किसानों के साथ-साथ पूरे कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है। आने वाले समय में मौसम के बदलावों के अनुरूप बागवानी पद्धतियों को विकसित करना और किसानों को समय पर वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।
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