जम्मू और कश्मीर

उत्तर भारत का सबसे बड़ा झीरी मेला 4 नवंबर से जम्मू में शुरू होगा

SHIDDHANT
28 Oct 2025 9:49 PM IST
उत्तर भारत का सबसे बड़ा झीरी मेला 4 नवंबर से जम्मू में शुरू होगा
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Jammu जम्मू: उत्तर भारत का प्रसिद्ध झीरी मेला (Jhiri Mela) इस वर्ष 4 नवंबर से 13 नवंबर तक भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। परंपरा और आस्था के इस अनूठे पर्व की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जम्मू के समीप स्थित किसान बाबा झीरी मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी, सजावट और नए रंग-रोगन से दुल्हन की तरह सजाया गया है। मेला का औपचारिक उद्घाटन जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Lt. Governor Manoj Sinha) करेंगे। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए सभी इंतजाम पूरे कर लिए हैं। हर साल इस मेले में लाखों श्रद्धालु देशभर से पहुंचते हैं, जो किसान बाबा झीरी को नमन कर अपनी समृद्धि और सुख-शांति की कामना करते हैं।
झीरी मेला की ऐतिहासिक मान्यता सैकड़ों वर्ष पुरानी है। यह मेला किसान बाबा झीरी की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ किसानों की आवाज बुलंद की थी। उनकी सच्चाई और त्याग की प्रेरक कहानी आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। यह आयोजन किसानों की मेहनत, आत्मसम्मान और एकता का प्रतीक माना जाता है। मेला आयोजन समिति के सदस्यों के अनुसार, इस बार मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, संगीत, पारंपरिक झूले और स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। ग्रामीण हस्तशिल्प, हस्तकला और कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।
प्रशासनिक तैयारियां पूरी:
जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। भीड़ नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, सफाई और प्रकाश व्यवस्था के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। जम्मू के उपायुक्त ने बताया कि मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग स्थल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और विश्राम शिविर भी बनाए गए हैं।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में CCTV कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही, महिला सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।
सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक:
झीरी मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि यह जम्मू क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी उजागर करता है। स्थानीय लोक कलाकारों और स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले कार्यक्रमों से मेले का वातावरण जीवंत और पारिवारिक बनता है।
स्थानीय व्यापार को बढ़ावा:
मेला हर साल हजारों स्थानीय व्यापारियों, किसानों और हस्तशिल्पकारों के लिए आर्थिक अवसर भी लेकर आता है। मिठाइयों, खिलौनों, कृषि औजारों और कपड़ों की दुकानों से मेला स्थल जीवंत हो उठता है।
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