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श्रीनगर, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को कश्मीर मैराथन के पुरस्कार समारोह को संबोधित किया। उन्होंने सभी विजेताओं को उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए बधाई दी और कहा कि हर पदक समर्पण, दृढ़ता और एक सपने को पूरा करने की कोशिश का प्रतीक है। इस आयोजन में कुल 68 पदक दिए गए, जिनमें फुल मैराथन और हाफ मैराथन श्रेणियों में 34-34 पदक शामिल थे।
अपने संबोधन में, उपराज्यपाल ने जोर देकर कहा कि मैराथन की असली भावना केवल विजेताओं में ही नहीं, बल्कि दौड़ पूरी करने वाले हर प्रतिभागी में होती है। उन्होंने कहा कि जो लोग घंटों की कड़ी मेहनत के बाद दौड़ पूरी करते हैं, वे अक्सर कई कठिन चुनौतियों को पार करके आते हैं। ऐसे में, उनके दृढ़ संकल्प और साहस के लिए उन्हें भी उतना ही सम्मान मिलना चाहिए।
उपराज्यपाल ने मैराथन में जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए एक अलग श्रेणी शामिल किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के हर कोने में प्रतिभा मौजूद है, लेकिन सभी को समान अवसर नहीं मिल पाते। उन्होंने कहा कि कश्मीर मैराथन ने केंद्र शासित प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों के युवाओं को अपनी क्षमता पहचानने और उसे दुनिया के सामने लाने के लिए एक बेहतरीन मंच दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सही समर्थन और प्रोत्साहन मिलने पर जम्मू-कश्मीर से भविष्य के मैराथन चैंपियन सामने आएंगे।
उन्होंने कहा, "पर्यटन विभाग, जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल और निजी संस्थानों को आज के स्थानीय विजेताओं के लिए प्रशिक्षक उपलब्ध कराने चाहिए। उन्हें सहयोग और मार्गदर्शन देना चाहिए, ताकि इस मैराथन के आधार पर वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों तक पहुँच सकें। मैं चाहता हूँ कि आज कश्मीर मैराथन में स्थानीय युवाओं द्वारा जीते गए पदक एक नई यात्रा की शुरुआत बनें।"
उपराज्यपाल ने इस आयोजन के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कद पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कश्मीर मैराथन ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और श्रीनगर को लंबी दूरी की प्रतिष्ठित दौड़ आयोजित करने वाले शहरों की सूची में शामिल करने में मदद की है। उन्होंने कहा कि पूरे भारत और विदेशों से आने वाले प्रतिभागी जम्मू-कश्मीर के 'राजदूत' की तरह काम करते हैं, जो यहाँ के लोगों के आतिथ्य और प्राकृतिक सुंदरता की यादें अपने साथ ले जाते हैं।
उपराज्यपाल ने फिटनेस को बढ़ावा देने और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक करने में मैराथन की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन लोगों को स्वस्थ आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं और निरंतर प्रयास, अनुशासन तथा विपरीत परिस्थितियों में डटे रहने के महत्व को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा, “मैराथन लोगों को एक स्वस्थ जीवन की ओर नई शुरुआत करने के लिए प्रेरित करती हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि इस कश्मीर मैराथन में युवाओं के साथ-साथ 50 वर्ष से अधिक उम्र के धावकों को देखकर, लाखों लोग प्रेरित होंगे। वे भी आगे कदम बढ़ाएंगे और कम से कम अपनी दिनचर्या में रोज़ाना टहलने (वॉक करने) को शामिल करेंगे।”
उपराज्यपाल ने युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वे मैराथन के अपने अनुभवों से ताकत लें और भविष्य की चुनौतियों का सामना पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ करें। उन्होंने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी प्रतिबद्धता, कड़ी मेहनत और सामूहिक प्रगति की भावना के ज़रिए एक विकसित भारत और आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर के निर्माण में योगदान दें।
“भविष्य को सही दिशा देना हमारे अपने हाथों में है। आज यह ज़रूरी है कि हम अपने कल की ज़िम्मेदारी खुद लें और दृढ़ प्रयासों से एक नया इतिहास रचें। एक विकसित भारत और आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर के लिए, हमें अपने व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर एक ऐसी मज़बूत शक्ति का निर्माण करना होगा, जो हर चुनौती को एक अवसर में बदल दे। मैं जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों की सराहना करता हूँ कि उन्होंने पिछले छह वर्षों में एक अनुकूल माहौल तैयार किया है, जिससे इस केंद्र शासित प्रदेश में इतने प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के आयोजन का रास्ता साफ़ हुआ है,” उपराज्यपाल ने कहा। इस सम्मान समारोह में मुख्य सचिव अटल डुल्लू; पर्यटन विभाग की सचिव अवनी लवासा; कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग; कश्मीर के आईजीपी सुजीत कुमार; श्रीनगर के एसएसपी डॉ. जी.वी. संदीप चक्रवर्ती; श्रीनगर के उपायुक्त अक्षय लाब्रू; नागरिक और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी; प्रमुख नागरिक; खिलाड़ी और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।
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