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फिल्म संस्थान के आंदोलन पर बढ़ी तकरार, शाह की टिप्पणी पर भाजपा हमलावर
nidhi
26 Oct 2026 7:31 AM IST

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भाजपा से तेज हुआ टकराव
नई दिल्ली: अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शाह ने भाजपा पर अपनी विचारधारा और नीतियों से असहमत लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि अभिनेता भाजपा के विरोध की आड़ में भारत के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। जोशी ने देश में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर उठाए जा रहे सवालों को भी खारिज किया।
कर्नाटक के हुबली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जोशी ने कहा कि कुछ लोग बार-बार भारत में लोकतंत्र नहीं होने की बात करते हैं, जबकि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखने की स्वतंत्रता मिल रही है। उन्होंने तर्क दिया कि खुलकर आलोचना कर पाना ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की मौजूदगी का प्रमाण है। केंद्रीय मंत्री ने शाह की राजनीतिक टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा का विरोध करते समय वह देश को निशाना बना रहे हैं। यह जोशी का राजनीतिक आरोप है।
विवाद की पृष्ठभूमि फिल्म संस्थान में चल रहा छात्र आंदोलन है। नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में आंदोलनकारी विद्यार्थियों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन से जवाबदेही मांगने पर छात्रों को कारण बताओ नोटिस दिए गए, निगरानी और धमकियों का सामना करना पड़ा तथा छात्रावास खाली करने को कहा गया। अभिनेता ने इन कदमों को असहमति दबाने की कोशिश बताया। उनके अनुसार, फिल्म निर्माण सीख रहे युवाओं के साथ होने वाला व्यवहार पूरे रचनात्मक समुदाय की चिंता का विषय होना चाहिए।
शाह ने अपने संदेश में भविष्य के फिल्मकारों की स्वतंत्र सोच पर भी जोर दिया। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह युवा फिल्मकारों को डराने या अपनी सोच के अनुरूप ढालने का प्रयास कर रही है। अभिनेता का कहना था कि यही विद्यार्थी आगे चलकर समाज, देश और अपने समय की वास्तविकताओं को फिल्मों के माध्यम से सामने रखेंगे। उन्होंने नागरिकों से छात्रों के समर्थन में आने की अपील की। हालांकि, राजनीतिक प्रतिशोध और विद्यार्थियों को डराने संबंधी बातें शाह के आरोप हैं; इन्हें किसी जांच का स्थापित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
संस्थान में विवाद 27 सितंबर को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुए टकराव से जुड़ा है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के सदस्य शामिल थे। छात्रों और संगठन के सदस्यों के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। विद्यार्थियों का कहना था कि विरोध जताने पर उन पर हमला किया गया, जबकि आयोजक पक्ष ने छात्रों पर कार्यक्रम में बाधा डालने और बैनर क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगाया।
इन घटनाओं के बाद विद्यार्थियों ने परिसर में सुरक्षा और प्रशासन की जवाबदेही का मुद्दा उठाया। प्रदर्शनकारी छात्र कुलपति संतोष अजमेरा के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 12 अक्टूबर से कुलपति कार्यालय के बाहर धरना जारी है। छात्र पक्ष का आरोप है कि प्रशासन परिसर में हुई हिंसा के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहा। दूसरी तरफ, संस्थान में अनुशासन और कार्यक्रम के दौरान हुई घटनाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। यही परस्पर विरोधी दावे आंदोलन और प्रशासन के बीच टकराव के केंद्र में हैं।
इस बीच संस्थान में छह विद्यार्थियों के निलंबन तथा 13 नवंबर तक कक्षाएं स्थगित किए जाने की जानकारी सामने आई है। छात्रावास खाली करने के निर्देश का भी प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया। विद्यार्थियों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। फिल्म निर्देशक पायल कपाड़िया समेत फिल्म जगत की अन्य हस्तियों ने भी छात्रों का समर्थन किया है। कुलपति की ओर से विद्यार्थियों की सुरक्षा और पढ़ाई के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए बातचीत से समाधान निकालने की बात कही गई है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी बने हुए हैं।
भाजपा के अलावा शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने भी शाह की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अभिनेता पर राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर बयान देने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें अपनी कलात्मक प्रतिष्ठा का ध्यान रखना चाहिए। उधर, अभिनेता गजेंद्र चौहान ने शाह के रुख को एकतरफा बताते हुए बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने पर जोर दिया। इस तरह संस्थान का आंदोलन अब फिल्म जगत और राजनीतिक दलों के बीच बहस का विषय बन गया है।
परिसर में हुई हिंसा की जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। घटना से जुड़े तीन मामलों की जांच उसके दायरे में रखी गई। छात्रों और आयोजकों के अलग-अलग आरोपों के बीच जांच का महत्व बढ़ जाता है। फिलहाल शाह की टिप्पणी और भाजपा की प्रतिक्रिया से राजनीतिक विवाद तेज है, जबकि संस्थान में सुरक्षा, अनुशासनात्मक कार्रवाई और पढ़ाई बहाल करने से जुड़े सवाल समाधान की मांग कर रहे हैं।
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