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कांग्रेस ने बताया वैचारिक संदर्भ
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने बयान को प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का अपमान बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। वहीं, कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष का बचाव करते हुए कहा है कि टिप्पणी का संदर्भ प्रधानमंत्री के परिवार से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से था। पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने दावा किया कि खरगे ने भाजपा के वैचारिक मार्गदर्शक के संदर्भ में यह बात कही थी।
पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। खरगे बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती से जुड़े आयोजन में संबोधित कर रहे थे। भाषण में उन्होंने भाजपा, संघ और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। इसी दौरान सभागार में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके संबोधन के बीच टिप्पणी की। उसके जवाब में खरगे ने जो शब्द इस्तेमाल किए, उन्हें लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गईं। कार्यक्रम के दौरान कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति भी बनी।
पवन खेड़ा ने कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कहा कि खरगे की टिप्पणी को पूरे घटनाक्रम के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, भाषण के दौरान पहले कांग्रेस अध्यक्ष के पिता को लेकर आपत्तिजनक बात कही गई थी। खेड़ा ने आरोप लगाया कि ऐसा करने वाला व्यक्ति भाजपा कार्यकर्ता था। उन्होंने कहा कि खरगे ने उसी के जवाब में प्रधानमंत्री के वैचारिक मार्गदर्शक के तौर पर संघ और उसके नेतृत्व का उल्लेख किया। कांग्रेस का तर्क है कि बयान को प्रधानमंत्री के पारिवारिक संदर्भ से जोड़ना सही व्याख्या नहीं है।
हालांकि, संबोधन के बीच बोलने वाले व्यक्ति की राजनीतिक पहचान को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। कांग्रेस की ओर से उसे भाजपा कार्यकर्ता बताया गया, जबकि कुछ रिपोर्टों में उसे कांग्रेस से नाराज कार्यकर्ता कहा गया है। ऐसे में उसकी पहचान पर किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा। विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कांग्रेस की सफाई बयान की उसकी अपनी व्याख्या है, जबकि भाजपा उसी टिप्पणी को प्रधानमंत्री के पिता के प्रति अपमानजनक मान रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी खरगे के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि भाषण के दौरान व्यवधान के जवाब में कही गई बात को अपमान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बघेल ने इसे बोलचाल की अभिव्यक्ति बताते हुए भाजपा की आपत्ति पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि राजनीतिक भाषणों में इस्तेमाल होने वाले ऐसे वाक्यों का अर्थ केवल शाब्दिक आधार पर तय नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री की भाषा पर भी सवाल उठाते हुए भाजपा पर पलटवार किया।
दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खरगे की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक विरोध के दौरान प्रधानमंत्री और उनके परिवार के प्रति अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करती रही है। भाजपा का कहना है कि किसी नेता से राजनीतिक असहमति होने पर उसके दिवंगत परिजनों को बहस में शामिल करना स्वीकार्य नहीं है। पार्टी नेताओं ने बयान को राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा। इस तरह विवाद अब एक टिप्पणी से आगे बढ़कर सार्वजनिक संवाद की भाषा पर टकराव में बदल गया है।
भाजपा के अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस अध्यक्ष के बयान का विरोध किया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर राजनीतिक निराशा में प्रधानमंत्री और उनके परिवार को निशाना बनाने का आरोप लगाया। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी टिप्पणी की आलोचना की और कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की। पार्टी ने सोमवार को राज्य मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा भी की। भाजपा इस मुद्दे को प्रधानमंत्री के परिवार के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस लगातार इसे वैचारिक और राजनीतिक संदर्भ में रख रही है।
इस मामले में पटना के कोतवाली थाने में शिकायत दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। शिकायतकर्ता ने टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई और माफी की मांग की है। हालांकि, थाने में शिकायत देना और प्राथमिकी दर्ज होना अलग प्रक्रियाएं हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे शिकायत के रूप में ही बताया जा रहा है। इस बीच कांग्रेस का बचाव और भाजपा का विरोध दोनों जारी हैं। पूरे विवाद में मुख्य मतभेद बयान के आशय को लेकर है—कांग्रेस इसे संघ के संदर्भ में कही गई बात बता रही है और भाजपा इसे प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का अपमान मान रही है।
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