जम्मू और कश्मीर

लद्दाख प्रशासन पर विच-हंट का आरोप

Kiran
5 Nov 2026 8:25 AM IST
लद्दाख प्रशासन पर विच-हंट का आरोप
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लेह/जम्मू: शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने बुधवार को लद्दाख प्रशासन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह अपने फैसलों पर सवाल उठाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों को निशाना बना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि HIAL और उसके स्कूल के खिलाफ की गई कार्रवाई, इस क्षेत्र में "असहमति की आवाज़ को दबाने" की एक कोशिश है। हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) को 'डेजर्ट फ्लावर स्कूल' (फ्यांग में स्थित) से जुड़ी गतिविधियों को रोकने का नोटिस मिलने पर, वांगचुक ने प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों पर लगाई गई पाबंदियों और केंद्र शासित प्रदेश में शराब की दुकानों/प्रतिष्ठानों के लिए नियमों में दी गई ढील के बीच का बड़ा अंतर उजागर किया।
लेह में अपनी पत्नी और HIAL की सह-संस्थापक व CEO गीतांजलि जे. आंग्मो के साथ पत्रकारों से बात करते हुए वांगचुक ने कहा, "शिक्षा को रोक दो, बच्चों को शिक्षित होने से रोको, स्कूलों को बंद रखो, लेकिन शराब को आसानी से उपलब्ध कराओ और पूरे क्षेत्र को शराब की लत की ओर धकेल दो। हमें तो यही लगता है कि इनकी नीतियां यही हैं।" नोटिस के समय और उसके जारी होने के तरीके पर सवाल उठाते हुए, वांगचुक ने आरोप लगाया कि प्रशासन का मकसद अभिभावकों के बीच "घबराहट पैदा करना" है, ताकि वे मजबूर होकर अपने बच्चों को स्कूल से निकाल लें।
लद्दाख प्रशासन ने हाल ही में वांगचुक द्वारा स्थापित HIAL को निर्देश दिया है कि वह 'डेजर्ट फ्लावर स्कूल' के संचालन से जुड़ी कोई भी गतिविधि तब तक न करे, जब तक कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं सुना देता। यह निर्देश लेह के तहसीलदार कार्यालय द्वारा 1 नवंबर को जारी एक नोटिस के जरिए दिया गया, जो गीतांजलि आंग्मो को संबोधित था।
केंद्र शासित प्रदेश (UT) प्रशासन ने 21 अगस्त 2025 को HIAL को आवंटित की गई जमीन को रद्द कर दिया था। इसके बाद, संस्थान ने उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की, जिस पर अभी सुनवाई चल रही है। वांगचुक ने कहा, "हमें लगता है कि एक तरह का 'विच-हंट' (दमनकारी अभियान) चल रहा है। इसका एक कारण लद्दाख में लोकतंत्र, लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा के लिए चल रहा व्यापक आंदोलन है। दूसरा कारण यह है कि हाल के महीनों में, जब से मौजूदा उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने पद संभाला है, कई मनमानी नीतियां और फैसले लागू किए गए हैं, जिससे लद्दाख के लोगों को काफी परेशानी हुई है। जो लोग इन नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं, वे प्रशासन के निशाने पर आ जाते हैं।"
शराब और बार नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं इस कदम का विरोध कर रही थीं। उन्होंने दावा किया कि शराब से जुड़े प्रतिष्ठानों के लिए जरूरी NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की संख्या 16 से घटाकर 6 कर दी गई है। इसके उलट, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन HIAL (Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh) पर दबाव डाल रहा है कि वह एक ऐसा NOC ले, जो यह प्रमाणित करे कि स्कूल की प्रबंध समिति के सदस्य गैर-राजनीतिक हैं। जबकि, लागू शिक्षा नीति में ऐसी कोई शर्त है ही नहीं।
उन्होंने कहा, "हमारे सभी बोर्ड सदस्य स्वतंत्र हैं और उनका किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है। फिर भी, प्रशासन की अपनी नीतियों में भी ऐसी कोई शर्त नहीं है।" उन्होंने आगे बताया कि डिप्टी कमिश्नर और कलेक्टर ने भी यह माना है कि ऐसी कोई शर्त नहीं है, फिर भी यह मामला अटका हुआ है। वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि HIAL के खिलाफ की जा रही कार्रवाई, शराब, पर्यटन, जमीन और पर्यावरण के मुद्दों पर प्रशासन की नीतियों की उनके द्वारा लगातार की गई आलोचना से जुड़ी है।
इस पर्यावरण कार्यकर्ता ने विशेष रूप से सिंधु नदी के किनारे 'रॉक डैम' (पत्थरों के बांध) बनाने में सार्वजनिक धन खर्च करने पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये ढांचे विफल रहे हैं और इनसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परियोजनाओं और अन्य सरकारी नीतियों पर सवाल उठाने की वजह से प्रशासन नाराज हो गया है। उन्होंने कहा, "हमने शराब नीति, रॉक डैम, पर्यटन नीति, और जमीन व अन्य नियामक मामलों से जुड़ी नीतियों पर बात की है। हमने लगातार इन मुद्दों पर अपनी चिंताएं जताई हैं। हमें लगता है कि अपनी बात रखने की वजह से ही हम प्रशासन के निशाने पर आ गए हैं।" 'डेजर्ट फ्लावर स्कूल' को मिले नोटिस पर दुख जताते हुए वांगचुक ने कहा कि यह बहुत हैरानी की बात है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले एक संस्थान को अपनी गतिविधियां रोकने के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "सबसे दुखद बात यह है कि एक ऐसी संस्था, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, जिसके प्रोजेक्ट्स को 'टाइम' (TIME) मैगज़ीन में जगह मिली है और जिसका काम लंदन के एक अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है, उसे अब बंद करने की कोशिश की जा रही है।"
उन्होंने शिक्षा संबंधी संसदीय समिति से मिली मान्यता और HIAL के शैक्षिक मॉडल को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के पूर्व अध्यक्ष से मिले प्रोत्साहन का भी जिक्र किया। नोटिस के समय और इसके प्रचार-प्रसार पर सवाल उठाते हुए, वांगचुक ने आरोप लगाया कि प्रशासन का मकसद किसी वास्तविक कानूनी या तकनीकी मुद्दे को सुलझाना नहीं, बल्कि अभिभावकों के बीच "घबराहट पैदा करना" है। उन्होंने कहा, "मेरा निजी आकलन यह है कि इस कदम का मकसद कानूनी या तकनीकी आधार पर सफल होना था ही नहीं। अधिकारियों को खुद पता है कि कानूनी और तकनीकी रूप से, यह कदम टिक नहीं पाएगा।"
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