जम्मू और कश्मीर

KPS का बयान, पंडितों की सहमति से ही वापसी और पुनर्वास होगा

Payal
6 May 2026 4:01 PM IST
KPS का बयान, पंडितों की सहमति से ही वापसी और पुनर्वास होगा
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Jammu.जम्मू: वरिष्ठ नेता केपीएस (KPS) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि विस्थापित पंडितों की वापसी और पुनर्वास तभी संभव है जब उनके निर्णय और सहमति से यह प्रक्रिया की जाए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि प्रशासन और राज्य सरकार को इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए।
केपीएस ने बताया कि विस्थापित पंडित दशकों से अपने पैतृक स्थानों से दूर रह रहे हैं और उनकी वापसी न केवल उनके अधिकारों का सम्मान करेगी, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्स्थापना में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। उन्होंने कहा कि वापसी के लिए जरूरी है कि पंडित समुदाय अपनी स्वीकृति और सुरक्षा की गारंटी के साथ इस कदम के लिए तैयार हो।
इस अवसर पर केपीएस ने यह भी कहा कि राज्य और केंद्र सरकार को पंडित समुदाय के पुनर्वास के लिए प्रभावी योजना तैयार करनी चाहिए। इसमें आवास, बुनियादी सुविधाएं, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का समावेश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कार्य योजना और संसाधनों की उपलब्धता जरूरी है।
केपीएस ने जोर देकर कहा कि यह प्रयास किसी भी तरह के दबाव या एकतरफा निर्णय से नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “पंडित समुदाय की स्वीकृति और उनकी भावनाओं का सम्मान करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। जब तक समुदाय पूरी तरह सुरक्षित और सहमत नहीं होता, तब तक किसी भी तरह का बलपूर्वक पुनर्वास अनुचित होगा।”
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का दृष्टिकोण क्षेत्र में स्थिरता और सामूहिक सहमति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से न केवल विस्थापित पंडितों को न्याय मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास और सहयोग भी मजबूत होगा।
स्थानीय प्रशासन ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पंडित समुदाय की वापसी और पुनर्वास के लिए उचित समय और योजना सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सुरक्षा उपाय, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
केपीएस ने यह भी कहा कि वापसी के प्रयास केवल राजनीतिक नहीं होने चाहिए, बल्कि यह सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने अपील की कि सभी राजनीतिक और सामाजिक संस्थाएं मिलकर इस दिशा में सामूहिक प्रयास करें और विस्थापित पंडितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करें।
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