- Home
- /
- राज्य
- /
- जम्मू और कश्मीर
- /
- Jammu -Kashmir में...
Jammu -Kashmir में रिज़र्वेशन पॉलिसी पर JKSA की कड़ी आलोचना

Srinagar श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने जम्मू और कश्मीर सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की रिज़र्वेशन पॉलिसी के मुद्दे पर रवैया “दोहरे मापदंड का साफ़ प्रदर्शन” है। यह बयान बुधवार को उस समय सामने आया, जब जम्मू और कश्मीर विधानसभा में रिज़र्वेशन से संबंधित मुद्दे पर चर्चा हो रही थी।
एसोसिएशन के नेशनल स्पोक्सपर्सन डॉ. ज़ुबैर रेशी ने कहा कि सरकार की ओर से उठाए गए कदमों में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी महसूस हो रही है। उनका आरोप है कि सरकारी नीतियां समाज के एक बड़े हिस्से, खासकर ओपन मेरिट कैटेगरी (OMC) के उम्मीदवारों के लिए समस्याएं उत्पन्न कर रही हैं। डॉ. रेशी ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि ओपन मेरिट कैटेगरी के उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा करने में सरकार का रवैया सटीक और निहित स्वार्थों से भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि यह विरोध उस वक्त और भी बढ़ा, जब जम्मू और कश्मीर के विधायक बशीर अहमद वीरी ने एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया, जिसमें राज्य के मौजूदा रिज़र्वेशन फ्रेमवर्क में बदलाव की मांग की गई थी। यह बिल विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों के लिए थे, जिनके लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता की कमी की बात की गई थी। बशीर अहमद वीरी ने इस मुद्दे पर कहा था कि यह बदलाव ओपन मेरिट कैटेगरी के उम्मीदवारों को उनके अधिकारों की पुनः स्थापना और बराबरी की स्थिति में लाने के लिए जरूरी है।
डॉ. रेशी ने कहा कि सरकार द्वारा इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और यह स्थिति अब असहनीय हो गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह बिल, जो सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता था, सरकार के अव्यवहारिक रवैये के कारण ठंडे बस्ते में चला गया। उनका कहना था, "यह स्पष्ट है कि सरकार ने रिज़र्वेशन पॉलिसी के नाम पर समाज के एक हिस्से को खामोश कर दिया है।"
डॉ. रेशी ने आगे कहा, "हम इस स्थिति का विरोध करते हैं और चाहते हैं कि सरकार ओपन मेरिट कैटेगरी के उम्मीदवारों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास करे। वर्तमान में लागू नीति ने समाज के इस वर्ग के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। रिज़र्वेशन की पॉलिसी का जो ढांचा है, वह समानता की अवधारणा को नकारते हुए भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है।" एसोसिएशन ने राज्य सरकार से यह भी आग्रह किया कि वे जल्द से जल्द इस मुद्दे पर विचार करें और समग्र रूप से एक समान और पारदर्शी रिज़र्वेशन नीति का निर्माण करें, ताकि हर वर्ग के उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके। एसोसिएशन ने सरकार से यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का रवैया और अधिक निष्पक्ष होगा।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने कहा कि वे मुद्दे को गंभीरता से देख रहे हैं और सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, अभी तक इस मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान में जम्मू और कश्मीर में रिज़र्वेशन से संबंधित विवाद राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बन चुका है, और एसोसिएशन द्वारा उठाए गए सवालों ने इस मुद्दे को और भी जटिल बना दिया है। यह देखना बाकी है कि सरकार इस मुद्दे को किस दिशा में आगे बढ़ाती है और समाज के विभिन्न वर्गों को कैसे संतुष्ट करती है।





