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J&K : सर्वधर्म संगम, ऑर्गन डोनेशन को मिला सभी समुदायों का समर्थन

Jammu जम्मू: जम्मू-कश्मीर में पहली बार विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों ने एक साथ आकर ऑर्गन डोनेशन जैसे जीवन रक्षक कार्य का समर्थन किया। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में सभी समुदायों ने एक स्वर में कहा कि किसी भी बड़े धर्म में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो अंगदान जैसे मानव जीवन बचाने वाले कार्य को रोकता हो।
यह कार्यक्रम स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइज़ेशन (SOTTO) जम्मू-कश्मीर और S.S. जैन सभा जम्मू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर “सर्व धर्म अवेयरनेस मीट” का आयोजन किया गया, जिसमें मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई और जैन समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अंगदान के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना और इसे धार्मिक दृष्टिकोण से जोड़कर उत्पन्न होने वाली भ्रांतियों को दूर करना था। सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि अंगदान एक महान मानवीय कार्य है, जो किसी भी धर्म की भावना के खिलाफ नहीं है।
इस मौके पर SOTTO जम्मू-कश्मीर की संयुक्त निदेशक डॉ. पूनम महाजन ने कहा कि इस्लाम, हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन धर्म सभी दया, दान और मानव सेवा की भावना को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षाएं मानव जीवन की रक्षा और दूसरों की मदद करने पर जोर देती हैं, जो अंगदान के मूल उद्देश्य से मेल खाती हैं।
डॉ. महाजन ने धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंगदान को किसी धर्म के विरुद्ध मानना सही नहीं है, बल्कि इसे एक उच्च मानवीय कर्तव्य के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कार्य न केवल किसी व्यक्ति की जान बचाता है, बल्कि समाज में मानवता और करुणा की भावना को भी मजबूत करता है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि आज के समय में अंगदान की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। कई मरीज ऐसे हैं जिन्हें समय पर अंग न मिलने के कारण अपनी जान गंवानी पड़ती है, जबकि यदि समाज में जागरूकता हो तो कई जीवन बचाए जा सकते हैं।
प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि धर्म कभी भी मानवता के खिलाफ नहीं जाता, बल्कि वह हमेशा सेवा और करुणा का संदेश देता है। इसलिए अंगदान को धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
इस अवसर पर यह भी बताया गया कि अंगदान से न केवल एक व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है, क्योंकि एक दाता कई अंगों के माध्यम से कई लोगों की मदद कर सकता है।
SOTTO के अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज में अंगदान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना है, ताकि अधिक से अधिक लोग आगे आकर इस महान कार्य में भाग ले सकें।
कार्यक्रम के अंत में सभी समुदायों के प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने समुदायों में अंगदान को लेकर जागरूकता फैलाएंगे और लोगों को इसके लिए प्रेरित करेंगे।
कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर में आयोजित यह सर्वधर्म बैठक न केवल सामाजिक एकता का प्रतीक बनी, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि मानव जीवन की रक्षा के लिए सभी धर्म एक साथ खड़े हो सकते हैं।





