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Jammu and Kashmir जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने मंगलवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार द्वारा सात दिन का विधानसभा सत्र बुलाने की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम का मकसद सार्थक बहस, जनता के प्रति जवाबदेही और सरकार के कामकाज की जांच से बचना है। जम्मू में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि चुनी हुई सरकार को सत्ता में आए लगभग दो साल हो चुके हैं और लोगों को अपने प्रतिनिधियों से बहुत उम्मीदें हैं।
उन्होंने कहा, "विधानसभा वह संवैधानिक मंच है जहां लोगों की आवाज़, उनकी शिकायतें और उम्मीदें सरकार के सामने रखी जाती हैं। लेकिन NC सरकार विधानसभा सत्र को बेवजह छोटा रखकर इस लोकतांत्रिक संस्था का मज़ाक उड़ा रही है।" जम्मू-कश्मीर विधानसभा का ऑटम सेशन (पतझड़ सत्र) 21 सितंबर को श्रीनगर में शुरू होने वाला है।
शर्मा ने तर्क दिया कि भले ही सात बैठकें घोषित की गई हैं, लेकिन एक दिन शुरुआती कार्यवाही में निकल जाएगा और एक दिन "काम-काज, यदि कोई हो" के लिए तय किया गया है, जिससे ठोस चर्चा के लिए केवल पांच प्रभावी बैठकें ही बचेंगी। उन्होंने कहा, "सिर्फ़ पांच प्रभावी बैठकों में पूरे केंद्र शासित प्रदेश की चिंताओं पर चर्चा, बहस और जवाब कैसे दिया जा सकता है? यह गंभीर शासन नहीं है। यह सवालों से बचने की कोशिश है।" बीजेपी नेता ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल के तौर पर पार्टी सत्र के दौरान जनता से जुड़े मुद्दों को ज़ोर-शोर से उठाएगी।
शर्मा ने ज़ोर देकर कहा, "हम लोगों के मुद्दों को लेकर गंभीर हैं और उम्मीद करते हैं कि सरकार भी उतनी ही गंभीर होगी। NC सरकार सिर्फ़ इसलिए विधानसभा से भाग नहीं सकती क्योंकि वह अपनी नाकामियों से जुड़े मुश्किल सवालों का सामना नहीं करना चाहती।" उन्होंने कहा कि बीजेपी विधायकों ने पूरे जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर जन-संपर्क अभियान चलाया है और लोगों की शिकायतें जानने के लिए ज़िला मुख्यालयों व अन्य इलाकों में उनसे मुलाक़ात की है।
उन्होंने कहा, "लोग निराश हैं। वे हमसे विधानसभा में अपनी चिंताएं उठाने के लिए कह रहे हैं क्योंकि उन्हें अब भी भरोसा है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि सरकार से सवाल पूछ सकते हैं और जवाब मांग सकते हैं। हमने बीजेपी विधायकों की लंबी बैठकों के ज़रिए जन-मुद्दों की एक विस्तृत सूची तैयार की है और उन्हें ज़ोरदार ढंग से उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" शर्मा ने आगे आरोप लगाया कि रोज़मर्रा का कामकाज कमज़ोर हुआ है, सरकार का लोगों से संपर्क कम हुआ है और भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, "भ्रष्टाचार या लालफीताशाही के कारण किसी आम नागरिक को सरकारी दफ़्तर जाने में डर नहीं लगना चाहिए। सरकार को इन मुद्दों पर लोगों को जवाब देना होगा।" विपक्ष के नेता ने मांग की कि विधानसभा सत्र को कम से कम एक महीने तक बढ़ाया जाए, ताकि जनहित के मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सके और सरकार की जवाबदेही बढ़ाई जा सके।
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