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हिमाचल में मरीजों को राहत, ऑटोमेटेड लैब सिस्टम से एक सैंपल में होंगी कई जांच

शिमला। मानसून के बाद स्क्रब टायफस और अन्य मौसमी संक्रमणों के बढ़ते मामलों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य जांच व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों को बेहतर और तेज जांच सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ‘मिशन डायग्नोसिस’ के तहत दो स्तरों पर काम शुरू किया है।
इसके तहत एक ओर लैब टेक्नीशियन की कमी को दूर करने के लिए एमएलटी ग्रेड-11 के 18 पदों पर बैचवाइज भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के बड़े मेडिकल कॉलेजों में ऑटोमेटेड लैबोरेटरी सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को अलग-अलग जांच के लिए बार-बार रक्त का नमूना देने की जरूरत कम हो जाएगी। एक ही ब्लड सैंपल से कई प्रकार की जांच करने की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
जांच प्रक्रिया होगी तेज
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ऑटोमेटेड लैब सिस्टम लागू होने से जांच प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा। इससे मरीजों को जल्द रिपोर्ट मिल सकेगी और इलाज शुरू करने में तेजी आएगी।
वर्तमान व्यवस्था में कई बार अलग-अलग जांच के लिए मरीजों को अलग-अलग समय पर सैंपल देना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी होती है।
नई तकनीक के इस्तेमाल से एक ही नमूने से कई जांच करने की सुविधा मिलने से अस्पतालों में काम का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
चार महीने में लागू करने का लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग ने ऑटोमेटेड लैब सिस्टम को अगले चार महीनों में प्रदेश के बड़े मेडिकल कॉलेजों में लागू करने का लक्ष्य तय किया है।
इस व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को मिलने की उम्मीद है। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को कई बार जांच और रिपोर्ट के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
नई प्रणाली से समय की बचत होगी और मरीजों को उपचार में तेजी मिल सकेगी।
मौसमी संक्रमणों के बीच बढ़ी जरूरत
मानसून के बाद हिमाचल प्रदेश में स्क्रब टायफस समेत कई मौसमी संक्रमणों के मामले बढ़ने लगते हैं। ऐसे समय में अस्पतालों में जांच की मांग बढ़ जाती है।
समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज के लिए जांच व्यवस्था का मजबूत होना जरूरी माना जाता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
लैब टेक्नीशियन की कमी होगी दूर
स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में लैब टेक्नीशियन की कमी को पूरा करने के लिए एमएलटी ग्रेड-11 के 18 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है।
बैचवाइज भर्ती के माध्यम से इन पदों को भरा जाएगा। विभाग का मानना है कि पर्याप्त संख्या में लैब टेक्नीशियन उपलब्ध होने से अस्पतालों में जांच कार्य सुचारु रूप से चल सकेगा।
विशेषकर मेडिकल कॉलेजों और बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में बढ़ते मरीजों के दबाव को देखते हुए तकनीकी स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण है।
ग्रामीण मरीजों को मिलेगा फायदा
हिमाचल प्रदेश में कई मरीज दूर-दराज के पहाड़ी क्षेत्रों से इलाज के लिए मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचते हैं।
जांच में देरी होने से कई बार इलाज शुरू करने में भी देरी हो जाती है। ऑटोमेटेड लैब सिस्टम से रिपोर्ट जल्द मिलने पर डॉक्टर समय पर उपचार शुरू कर सकेंगे।
इससे मरीजों को बार-बार अस्पताल आने-जाने की परेशानी से भी राहत मिलेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक का इस्तेमाल
स्वास्थ्य विभाग लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है।
ऑटोमेटेड लैब सिस्टम इसी दिशा में एक कदम है। इसके जरिए जांच की गुणवत्ता बढ़ाने, समय कम करने और अस्पतालों की कार्यक्षमता सुधारने का प्रयास किया जाएगा।
तकनीक आधारित जांच व्यवस्था से मरीजों को अधिक सुविधाजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
अस्पतालों पर भी कम होगा दबाव
नई व्यवस्था से केवल मरीजों को ही नहीं, बल्कि अस्पतालों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
स्वचालित प्रणाली के कारण लैब में जांच प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। इससे कर्मचारियों का काम आसान होगा और रिपोर्ट तैयार करने में तेजी आएगी।
बढ़ते मरीजों की संख्या के बीच यह व्यवस्था अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती है।
मिशन डायग्नोसिस के तहत पहल
स्वास्थ्य विभाग ने ‘मिशन डायग्नोसिस’ के तहत जांच सुविधाओं को मजबूत करने का अभियान शुरू किया है।
इसमें मानव संसाधन बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक को अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
विभाग का उद्देश्य है कि प्रदेश के लोगों को समय पर और बेहतर जांच सुविधा मिल सके।
जल्द मिलेगी नई सुविधा
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ऑटोमेटेड लैब सिस्टम को लागू करने की तैयारियों में जुटा है। अगले चार महीनों में इसे बड़े मेडिकल कॉलेजों में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
अगर यह व्यवस्था सफल रहती है तो आने वाले समय में प्रदेश के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी इसका विस्तार किया जा सकता है।
हिमाचल में जांच व्यवस्था को आधुनिक बनाने की यह पहल मरीजों के लिए तेज, आसान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।





