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Jammu : मुहर्रम-आशूरा पर उमर अब्दुल्ला का बयान, जुलूस पुराने रास्ते पर लौटाने की कोशिश जारी

Jammu and Kashmir जम्मू-कश्मीर : मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुहर्रम के पवित्र महीने और 10वें मुहर्रम यानी आशूरा के अवसर पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने इस मौके पर हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी और उससे मिलने वाले संदेशों को याद करते हुए कहा कि इन सबकों को जीवन में अपनाने से ही समाज की बेहतरी संभव है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि मुहर्रम का महीना और विशेष रूप से आशूरा का दिन कितना अहम है। उन्होंने कहा कि हजरत हुसैन की कुर्बानी मानवता, सत्य और न्याय के लिए एक बड़ी मिसाल है, जिसे हमेशा याद रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, जब तक समाज इन मूल्यों और सबकों को याद रखता है, तब तक बेहतर दिशा में आगे बढ़ता है, लेकिन जब इन्हें भुला दिया जाता है, तो समस्याओं और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे यह उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में आशूरा के जुलूस अपने पुराने और पारंपरिक मार्गों पर लौट सकें। उन्होंने बताया कि इस दिशा में पहले भी कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन अब तक पूरी सफलता नहीं मिल पाई है। इसके बावजूद सरकार इस प्रयास को आगे भी जारी रखेगी।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं समाज की पहचान का अहम हिस्सा होती हैं और इन्हें संरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जुलूसों की परंपरा को सम्मान के साथ आगे बढ़ाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे जुड़ सकें और इतिहास तथा मूल्यों को समझ सकें।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हुए व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस बात को सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी भी तरह की बाधा न आए और लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक विविधता इसकी सबसे बड़ी ताकत है और इसे बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। सरकार का प्रयास है कि सभी धार्मिक आयोजनों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया जाए।
इस बयान के बाद राज्य में मुहर्रम और आशूरा के आयोजन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न समुदायों के लोगों ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं और पारंपरिक जुलूसों को लेकर उम्मीद जताई है कि भविष्य में इन्हें उनके पुराने मार्गों पर पुनः शुरू किया जा सकेगा।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस विषय को लेकर पहले से कई प्रयास किए जाते रहे हैं, ताकि धार्मिक जुलूसों को लेकर कोई विवाद या असुविधा न हो। सरकार का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के इस बयान को धार्मिक और सामाजिक समरसता की दिशा में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी दोहराया कि सरकार सभी समुदायों के साथ मिलकर शांति और भाईचारे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
फिलहाल राज्य में मुहर्रम और आशूरा के अवसर पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। विभिन्न स्थानों पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।





