जम्मू और कश्मीर

JAMMU: सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल से सेवाओं पर संकट

Ratna Netam
4 April 2026 4:23 PM IST
JAMMU: सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल से सेवाओं पर संकट
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JAMMU.जम्मू: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल ने मरीजों और उनके परिजनों के लिए स्थिति को गंभीर बना दिया है। हड़ताल के कारण अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं, जांच और दवाइयों की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे सामान्य और गंभीर दोनों प्रकार के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हड़ताल का मुख्य कारण स्वास्थ्य कर्मियों की सैलरी, कार्यभार और सेवा शर्तों में सुधार की मांग है। कर्मचारी संघ ने कहा कि लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। हड़ताल के कारण कई विभागों में सर्जरी, OPD सेवाएं और इमरजेंसी कक्ष प्रभावित हुए हैं।
मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि अस्पतालों में लंबी कतारें लग रही हैं और आवश्यक जांच और उपचार में देरी हो रही है। कई लोगों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है। चिकित्सक और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति को सुलझाने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण सेवाओं में व्यवधान बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि कर्मचारियों से बातचीत के लिए उच्चस्तरीय बैठकें की जा रही हैं और जल्द ही समाधान निकालने की कोशिशें जारी हैं। विभाग ने मरीजों से सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। यह केवल मरीजों की असुविधा नहीं बढ़ाता, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन-मरण का मामला भी बन सकता है। इसलिए, प्रशासन और कर्मचारियों के बीच समझौता और संवाद आवश्यक है।
हड़ताल के बीच, कई एनजीओ और स्थानीय सामाजिक संगठन आपातकालीन स्वास्थ्य सहायता केंद्र स्थापित कर मरीजों की मदद कर रहे हैं। हालांकि यह अस्थायी उपाय है और सरकारी अस्पतालों में सामान्य सेवाओं के बहाल होने तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रहेगी।
कुल मिलाकर, स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल ने जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पतालों में सेवाओं के संकट को उजागर कर दिया है। मरीजों को इलाज में देरी और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और कर्मचारी संघ के बीच संवाद और समाधान ही इस संकट को समाप्त कर सकता है।
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