जम्मू और कश्मीर

UN के प्रस्ताव पर भारत ने जताई सहमति लेकिन रख दी बड़ी शर्त

Ratna Netam
6 Sept 2026 3:43 PM IST
UN के प्रस्ताव पर भारत ने जताई सहमति लेकिन रख दी बड़ी शर्त
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नई दिल्ली। दुनिया के नक्शे को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक अहम प्रस्ताव पारित हुआ है, जिसके बाद वैश्विक मानचित्रों में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, लेकिन साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर अपनी स्थिति भी साफ कर दी। भारत ने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित इस प्रस्ताव का उद्देश्य दुनिया के नक्शों में भौगोलिक वास्तविकताओं को ज्यादा सही तरीके से दिखाना है। खास तौर पर उन मैप प्रोजेक्शन को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जो देशों और महाद्वीपों के वास्तविक आकार को बेहतर तरीके से दर्शाते हैं।
आखिर क्यों बदलने की जरूरत पड़ी दुनिया के नक्शे की?
दुनिया में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे कई नक्शे **मर्केटर प्रोजेक्शन** पर आधारित हैं। इसमें धरती को सपाट रूप में दिखाया जाता है, जिसके कारण ध्रुवों के पास मौजूद क्षेत्र वास्तविक आकार से बड़े दिखाई देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने नक्शों में अफ्रीका जैसे बड़े महाद्वीपों का आकार अपेक्षाकृत छोटा नजर आता है, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका के क्षेत्र ज्यादा बड़े दिखाई देते हैं। नए प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसी असमानताओं को कम करना है।
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में ज्यादा सटीक **इक्वल एरिया मैप प्रोजेक्शन** के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इससे देशों और महाद्वीपों का क्षेत्रफल ज्यादा वास्तविक रूप में दिखाई देगा।
भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में क्यों दिया वोट?
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव का समर्थन किया क्योंकि यह केवल नक्शों की तकनीकी सटीकता और बेहतर प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ है। भारत का मानना है कि दुनिया के क्षेत्रों को सही भौगोलिक अनुपात में दिखाना जरूरी है।
हालांकि भारत ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव के समर्थन का मतलब किसी विशेष नक्शे या किसी देश की सीमाओं को लेकर किसी अलग दावे को स्वीकार करना नहीं है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत की साफ चेतावनी
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी स्थिति दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं। किसी भी अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में इन क्षेत्रों को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए।
विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ी किसी भी गलत या भ्रामक प्रस्तुति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्यों संवेदनशील है जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का मुद्दा?
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का क्षेत्र लंबे समय से भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच विवाद का विषय रहा है। भारत इन दोनों क्षेत्रों को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में बांटा गया था।
लद्दाख रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है, क्योंकि इसकी सीमाएं चीन और पाकिस्तान से लगती हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर भी सुरक्षा और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
UN में प्रस्ताव को मिला भारी समर्थन
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला। रिपोर्टों के अनुसार प्रस्ताव के पक्ष में बड़ी संख्या में देशों ने मतदान किया, जबकि भारत ने समर्थन करते हुए अपनी क्षेत्रीय स्थिति को लेकर अलग से आपत्ति दर्ज कराई।
यह प्रस्ताव किसी देश की सीमाओं को बदलने वाला नहीं है, बल्कि दुनिया को दिखाए जाने वाले नक्शों के तरीके में सुधार से जुड़ा है।
नक्शे सिर्फ तस्वीर नहीं, राजनीति भी हैं
दुनिया में नक्शे केवल भौगोलिक जानकारी देने का माध्यम नहीं होते, बल्कि कई बार वे राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश भी देते हैं। किसी क्षेत्र को किस तरह दिखाया जाता है, इसका असर अंतरराष्ट्रीय धारणा पर पड़ सकता है।
इसी वजह से भारत ने प्रस्ताव का समर्थन करने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर अपनी स्थिति दोहराना जरूरी समझा।
आगे क्या बदलेगा?
UN के इस प्रस्ताव के बाद तुरंत दुनिया का नक्शा बदलने वाला नहीं है। यह एक दिशा-निर्देश की तरह है, जिसका उद्देश्य भविष्य में ज्यादा सटीक और संतुलित नक्शों को बढ़ावा देना है।
भारत की शर्त साफ है कि नक्शों में बदलाव या सुधार के नाम पर उसकी संप्रभुता और सीमाओं को लेकर कोई गलत प्रस्तुति स्वीकार नहीं की जाएगी।
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