- Home
- /
- राज्य
- /
- जम्मू और कश्मीर
- /
- IUST लाइब्रेरियन भर्ती...

x
श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के एक आदेश को रद्द कर दिया है। यह आदेश अवमानना कार्यवाही के दौरान दिया गया था, जिसमें IUST अवंतीपोरा के कुलपति शकील अहमद रोमशू के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। साथ ही, अदालत ने उम्मीदवार डॉ. इमरान के लिए लाइब्रेरियन के पद को सुरक्षित रखा है। मुख्य न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति मुहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने यह निर्देश तब दिया, जब वे लाइब्रेरियन शेख मुहम्मद इमरान से जुड़े मामले में CAT के आदेश के खिलाफ रोमशू द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। खंडपीठ ने ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि वह लंबित मूल आवेदन (ओरिजिनल एप्लीकेशन) पर तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला सुनाए। यह विवाद IUST में लाइब्रेरियन के तौर पर काम करने के इमरान के अधिकार से जुड़ा है।
उच्च न्यायालय ने गौर किया कि मुख्य विवाद अभी भी CAT के समक्ष लंबित है और इस पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। अदालत को बताया गया कि इमरान ने इस साल 22 सितंबर को कश्मीर विश्वविद्यालय में फिर से ज्वाइन कर लिया था और वहां लाइब्रेरियन के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उनके वकील फैजान मजीद भट ने अदालत को बताया कि CAT के आदेशों का पालन न होने के कारण उन्हें कश्मीर विश्वविद्यालय (KU) में वापस ज्वाइन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। भट ने कहा कि उनका वहां ज्वाइन करना एक बाद की घटना है, और इस मामले में कोई भी अन्य कदम उनके अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
इमरान के वकील ने कहा कि कश्मीर विश्वविद्यालय में उनका ज्वाइन करना 'विरोध जताते हुए' (under protest) था और यह CAT के 14 सितंबर के आदेश के अनुपालन में किया गया था। वकील ने तर्क दिया कि IUST में लाइब्रेरियन के तौर पर काम करने के उनके अधिकार पर फैसला लेना ही उचित होगा। अदालत ने कहा कि डॉ. इमरान के व्यापक हित को देखते हुए, लंबित मूल आवेदन पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाना चाहिए। अदालत ने आगे आदेश दिया कि इस मूल आवेदन पर तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही, अदालत ने इस्लामिक यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियन के पद पर इमरान के अधिकार को भी सुरक्षित रखा है, जो मूल आवेदन (OA) के अंतिम परिणाम के अधीन होगा।
Next Story





