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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा की 'याचिका समिति' (Committee on Petitions) ने शुक्रवार को श्रीनगर स्थित विधानसभा सचिवालय में एक बैठक आयोजित की। पीरज़ादा फारूक अहमद शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जम्मू-कश्मीर में जरूरी खाद्य पदार्थों में मिलावट के मुद्दे पर चर्चा की गई।
बैठक में विधायक मीर मोहम्मद फैयाज, जावेद रियाज (बेदार) और डॉ. सज्जाद शफी शामिल हुए। अध्यक्ष पीरज़ादा फारूक अहमद शाह ने कहा कि जरूरी खाद्य पदार्थों में मिलावट जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है, जो नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन पर असर डालता है। उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि मिलावट के मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' (सख्त रुख) अपनाएं, निरीक्षण बढ़ाएं, समय पर जांच सुनिश्चित करें, खाली पदों को भरें, प्रयोगशालाओं को मजबूत करें, 'एडजूडिकेटिंग अथॉरिटी' (न्यायनिर्णयन प्राधिकरण) के जरिए मामलों का निपटारा तेजी से करें और 'मिशन सेफ फूड' के तहत जागरूकता (IEC) गतिविधियों को तेज करें। उन्होंने खाद्य नमूनों की समय पर जांच और नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जम्मू और कश्मीर, दोनों क्षेत्रों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने की बात कही।
जम्मू-कश्मीर खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण (Food and Drugs Authority) के आयुक्त खालिद जहांगीर ने एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश की। इसमें संगठन का विवरण, कर्मचारियों की संख्या, समिति की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई (ATR), 03.08.2026 को दिए गए निर्देशों पर की गई कार्रवाई, जागरूकता (IEC) गतिविधियां और FSSAI के नियमों के अनुसार की गई प्रवर्तन (enforcement) कार्रवाई की मुख्य बातें शामिल थीं।
प्रवर्तन कार्रवाई के बारे में बताया गया कि 2026-27 में अक्टूबर तक कुल 11,720 निरीक्षण किए गए। इस दौरान प्रवर्तन के लिए 6,259 और निगरानी (surveillance) के लिए 2,508 नमूने लिए गए, तथा MFTV (मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन) के जरिए 5,179 नमूनों की जांच की गई। इसके अलावा, अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच ताजी सब्जियों, पैक्ड पीने के पानी, न्यूट्रास्यूटिकल्स (स्वास्थ्य पूरक), खाद्य तेल और वसा, घी, शहद, दूध और दुग्ध उत्पादों, मसालों, कैफीनयुक्त पेय पदार्थों, मांस उत्पादों, बेकरी उत्पादों और तैयार भोजन पर विशेष प्रवर्तन अभियान चलाए गए।
श्रीनगर की हजरतबल तहसील के खिमबर इलाके में कथित तौर पर जमीन पर कब्जा (अतिक्रमण) किए जाने से जुड़ी याचिका संख्या 2 के संबंध में, समिति ने श्रीनगर के अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) को निर्देश दिया कि वे राजस्व रिकॉर्ड की जांच करें, मौके की स्थिति का मुआयना करें और कथित अतिक्रमण के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपें। इसमें सरकारी और निजी ज़मीन की सुरक्षा करने और उचित सत्यापन के बाद कानून के अनुसार ज़रूरी कार्रवाई करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया। इस बैठक में खाद्य सुरक्षा संयुक्त आयुक्त, श्रीनगर के एडीसी, चाडूरा के एसडीएम, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, एफडीए के राज्य नोडल अधिकारी और विधानसभा सचिवालय के अधिकारी शामिल हुए।
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