जम्मू और कश्मीर

Udhampur मर्डर मामले में हाईकोर्ट ने बरीकरण का आदेश बनाए रखा

Ratna Netam
6 May 2026 3:49 PM IST
Udhampur मर्डर मामले में हाईकोर्ट ने बरीकरण का आदेश बनाए रखा
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Jammu.जम्मू: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने उधमपुर मर्डर केस में निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है। इस मामले में अभियोजन की अपील को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया, जिससे मामले में शामिल आरोपी कानून के अनुसार स्वतंत्र हो गए हैं। मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, यह हत्या मामला कुछ वर्षों पहले उधमपुर जिले में घटित हुआ था। प्रारंभिक जांच में कई व्यक्तियों को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया गया था। निचली अदालत ने विस्तृत सुनवाई और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद सभी आरोपियों को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार और अभियोजन पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि निचली अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों की सटीक समीक्षा की है। न्यायालय ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए अतिरिक्त तर्क और दलीलें बरीकरण के फैसले को चुनौती देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साक्ष्य के अभाव में किसी को दोषी ठहराना न्यायालय की जिम्मेदारी के खिलाफ होगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि “न्यायिक प्रक्रिया में सबूत की प्रधानता अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिना ठोस और विश्वसनीय सबूत के किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। निचली अदालत ने अपने फैसले में यही दृष्टिकोण अपनाया और हम इसे सही मानते हैं।”
वकीलों और विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। इससे यह संदेश जाता है कि अपराधियों को दंडित करना जरूरी है, लेकिन केवल ठोस सबूतों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय प्रशासन ने कहा कि मामले में बरी किए गए आरोपियों को अब कानूनी रूप से पूरी स्वतंत्रता है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि कानून के तहत किसी भी आपराधिक मामले में समय पर निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इस फैसले पर समाज में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नागरिकों ने उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया, इसे न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य आधारित निष्पक्षता का उदाहरण बताया। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता बनी रहती है। उधमपुर मर्डर केस का यह फैसला स्थानीय न्याय व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि दोषियों को सजा दिलाना आवश्यक है, लेकिन निर्दोषों के अधिकारों की सुरक्षा और सबूतों की कठोर समीक्षा सबसे अहम है।
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