जम्मू और कश्मीर

जन्मतिथि छेड़छाड़ मामले में हाईकोर्ट ने XEN को राहत देने से किया इंकार

Ratna Netam
7 May 2026 5:04 PM IST
जन्मतिथि छेड़छाड़ मामले में हाईकोर्ट ने XEN को राहत देने से किया इंकार
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Jammu.जम्मू: जम्मू हाईकोर्ट ने आज जन्मतिथि छेड़छाड़ मामले में एक्सईएन (XEN) की याचिका को खारिज करते हुए एफआईआर रद्द करने से इनकार किया। कोर्ट का यह निर्णय उस समय आया जब आरोपी अधिकारी ने यह दावा किया था कि उसके खिलाफ की गई शिकायत आधारहीन है और FIR रद्द कर दी जाए।
न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि एफआईआर एक प्रारंभिक जांच का हिस्सा है और इस पर सीधे रद्दीकरण का आदेश नहीं दिया जा सकता जब तक कि जांच पूरी नहीं हो जाती। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के मामले में साक्ष्यों और शिकायत की गंभीरता को ध्यान में रखकर जांच जारी रहनी चाहिए।
इस मामले की पृष्ठभूमि यह है कि एक सरकारी विभाग में जन्मतिथि में बदलाव या छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि XEN ने रिकॉर्ड में अनधिकृत रूप से जन्मतिथि में परिवर्तन किया जिससे उसके अधिकारों और सेवा रिकॉर्ड पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
XEN की ओर से दायर याचिका में तर्क दिया गया कि मामले में कोई गलत उद्देश्य नहीं था और यह प्रशासनिक भूल मात्र थी। उन्होंने कोर्ट से गुजारिश की कि FIR को रद्द किया जाए ताकि उनकी प्रतिष्ठा और नौकरी प्रभावित न हो।
हालांकि, न्यायालय ने कहा कि कोई भी प्रशासनिक भूल या व्यक्तिगत आरोप सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में सीधे राहत का आधार नहीं बन सकती। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से मामले की तह तक जाने दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह निर्णय सरकारी अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे आदेश से यह संदेश जाता है कि कोई भी अधिकारी नियमों के पालन से बाहर नहीं रह सकता और जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा।
शिकायतकर्ता ने मीडिया से कहा कि अदालत के इस फैसले से उन्हें विश्वास मिला कि न्याय प्रणाली उनके पक्ष में है और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं, XEN ने भी कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए कहा कि वे जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे।
जम्मू हाईकोर्ट का यह निर्णय सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ और अनुचित बदलाव के मामलों में निवारक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे भविष्य में अन्य अधिकारियों को यह चेतावनी भी मिलेगी कि किसी भी प्रकार की अनियमितता गंभीर रूप से जांची जाएगी।
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