जम्मू और कश्मीर

सर्दियों में गुज्जरों का पलायन शुरू, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

Kiran
22 Oct 2026 2:57 PM IST
सर्दियों में गुज्जरों का पलायन शुरू, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
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सर्दियों की शुरुआत के साथ, खानाबदोश गुज्जर और बकरवाल समुदाय जम्मू संभाग के ऊंचे पहाड़ी इलाकों से मैदानी इलाकों की ओर अपना मौसमी प्रवास शुरू कर रहे हैं। इसे देखते हुए, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने निगरानी और 'धोक' (खानाबदोशों के अस्थायी आश्रय स्थल) की जांच-पड़ताल तेज कर दी है, ताकि आतंकवादी इन खाली पड़े ठिकानों का फायदा न उठा सकें।
जैसे-जैसे तापमान गिरता है, ये समुदाय अपने पशुओं के साथ गर्म मौसम और बेहतर चरागाहों की तलाश में मैदानी इलाकों की ओर चले जाते हैं। अप्रैल और मई के महीनों में, जब मौसम फिर से बदलता है, तो ये लोग वापस अपने ऊंचे पहाड़ी इलाकों में लौट आते हैं और उन्हीं 'धोक' में रहने लगते हैं जिन्हें वे सर्दियों में खाली छोड़ गए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने रामबन, पुंछ, किश्तवाड़, डोडा और अन्य जिलों के संवेदनशील इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान और 'एरिया डोमिनेशन' (इलाके पर नियंत्रण बनाए रखने की कवायद) तेज कर दी है, जहां से ये खानाबदोश मैदानी इलाकों की ओर चले गए हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि रामबन पुलिस ने जिले के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। अधिकारी ने कहा, "सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और शांति व सुरक्षा बनाए रखने के अपने प्रयासों के तहत, रामबन के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने रामबन के गूल इलाके में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया।" इन अभियानों के बाद 'धोक' की सघन जांच, शॉर्ट-रेंज पेट्रोलिंग (SRP) और 'एरिया डोमिनेशन' जैसी गतिविधियां की गईं, ताकि निगरानी बढ़ाई जा सके, संवेदनशील जगहों को सुरक्षित किया जा सके और हर समय अलर्ट रहा जा सके। अधिकारी के अनुसार, इन कदमों का मकसद आतंकवादी गतिविधियों को रोकना, हालात पर नजर रखना और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इससे पहले भी सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में पाकिस्तानी आतंकवादियों को 'धोक' का इस्तेमाल छिपने की जगह के तौर पर करते हुए पाया है। इस साल फरवरी में, पहाड़ी जिले किश्तवाड़ में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादी मारे गए थे। बताया जाता है कि ये आतंकवादी एक 'धोक' के अंदर छिपे हुए थे, तभी सुरक्षा बलों को उनके वहां होने की खुफिया जानकारी मिली।
सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि पाकिस्तानी आतंकवादियों के छोटे-छोटे समूह जम्मू क्षेत्र के जंगली इलाकों में सक्रिय हो सकते हैं, जो सुरक्षा बलों से बचने के लिए एक जगह से दूसरी जगह आते-जाते रहते हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना ने घने जंगलों में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिए हैं, ताकि संदिग्ध आतंकवादियों का पता लगाया जा सके और उन्हें दूर-दराज के आश्रय स्थलों या दुर्गम इलाकों का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकाने के रूप में करने से रोका जा सके।
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