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जम्मू और कश्मीर
राज्य के दर्जे पर किसान नेता का बड़ा बयान, आतंकवाद को लेकर जताई चिंता
nidhi
5 Oct 2026 10:51 AM IST

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जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे पर फिर छिड़ी बहस
जम्मू: जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग के बीच किसान नेता सुभाष दसगोत्रा ने केंद्र सरकार से मौजूदा केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था को जारी रखने की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा दिए जाने से अलगाववाद और आतंकवाद जैसी समस्याएं फिर बढ़ सकती हैं। हालांकि यह किसान नेता का दावा है और इसे सुरक्षा स्थिति के बारे में स्थापित निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
मीरा साहिब में आयोजित पत्रकार वार्ता में सुभाष दसगोत्रा ने कहा कि केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे पर कोई भी निर्णय सोच-समझकर लेना चाहिए। दसगोत्रा ने कहा कि उनके अनुसार केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहले की तुलना में शांति का माहौल बना है। उन्होंने केंद्र सरकार से इसी व्यवस्था को आगे भी जारी रखने की मांग की।
किसान नेता ने पूर्व के वर्षों का जिक्र करते हुए दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के राज्य रहने के दौरान अलगाववाद, आतंकवाद और पत्थरबाजी की घटनाएं होती थीं। उन्होंने कहा कि उस दौरान पाकिस्तान के झंडे दिखाई देने जैसी घटनाएं भी सामने आती थीं। उन्होंने आशंका जताई कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने पर पुरानी परिस्थितियां वापस आ सकती हैं। इसी आधार पर उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा बहाल नहीं करने की अपील की।
दसगोत्रा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का भी विरोध किया। उनका कहना था कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए इसे केंद्र सरकार के अधीन केंद्र शासित प्रदेश के रूप में बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था में विकास कार्यों और आतंकवाद पर नियंत्रण को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने हाल ही में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी लगातार राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि राज्य का दर्जा बहाल करने के फैसले को आतंकवाद या सुरक्षा की स्थिति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर भाजपा के नेता भी राज्य का दर्जा बहाल करने की केंद्र की प्रतिबद्धता की बात करते रहे हैं, हालांकि हाल में विधानसभा में पारित प्रस्ताव के दूसरे राजनीतिक और संवैधानिक संदर्भों को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई थी।
ऐसे में सुभाष दसगोत्रा की मांग राज्य का दर्जा बहाल करने के पक्ष में चल रही राजनीतिक मांग से अलग रुख पेश करती है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि किसी भी निर्णय से पहले जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए। पत्रकार वार्ता के दौरान उनके साथ रमन कुमार, अशोक कुमार और जीतराम समेत अन्य लोग भी मौजूद रहे। फिलहाल जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश है। पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का अंतिम फैसला केंद्र सरकार और संसद से जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगा। राज्य का दर्जा मिलने से आतंकवाद बढ़ेगा या घटेगा, इस संबंध में किसान नेता का बयान उनका अपना आकलन है।
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