जम्मू और कश्मीर

विदेश नीति पर मणिशंकर अय्यर का बयान, पाकिस्तान से संवाद पर जोर

nidhi
5 Oct 2026 7:05 AM IST
विदेश नीति पर मणिशंकर अय्यर का बयान, पाकिस्तान से संवाद पर जोर
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मणिशंकर अय्यर ने उठाए सवाल
श्रीनगर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं करने की केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। रविवार को श्रीनगर में आयोजित पांचवें 'हल्ला बोल कॉन्क्लेव' में उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच दोबारा संवाद शुरू करने की वकालत की।
अय्यर ने सवाल किया कि अगर पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस है तो आमने-सामने बैठकर बातचीत करने का साहस क्यों नहीं दिखाया जा सकता। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने मतभेदों और लंबित मुद्दों पर बातचीत करनी चाहिए। अय्यर ने यह भी पूछा कि दोनों देश एक-दूसरे से बात क्यों नहीं कर सकते और संबंध सुधारने की दिशा में प्रयास क्यों नहीं किए जा सकते।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए अटारी-वाघा सीमा का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों का एक-दूसरे के देश में जाना संभव नहीं है तो सीमा पर ही बातचीत की व्यवस्था की जा सकती है। उनके मुताबिक, एक मेज सीमा रेखा पर रखी जा सकती है और दोनों देशों के प्रतिनिधि वहां बैठकर बातचीत जारी रख सकते हैं।
अय्यर ने कहा कि बातचीत के दौरान जिन मुद्दों पर समाधान निकलता है, उन पर आगे बढ़ना चाहिए। जिन विषयों पर तत्काल सहमति नहीं बनती, उन्हें कुछ समय के लिए अलग रखा जा सकता है और संवाद जारी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां बदलने के बाद लंबित मुद्दों पर दोबारा चर्चा की जा सकती है।
उन्होंने विदेश नीति को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। अय्यर के अनुसार, केवल अतीत के विवादों पर बहस करते रहना विदेश नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी रचनात्मक नतीजे तक पहुंचने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना जरूरी है, भले ही इसमें लंबा समय लगे। ये विचार अय्यर के हैं और भारत सरकार की पाकिस्तान नीति से अलग उनका राजनीतिक रुख प्रस्तुत करते हैं।
अय्यर ने चीन को लेकर भी केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने संबोधन में भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर चर्चा करते हुए मौजूदा विदेश नीति की आलोचना की। पाकिस्तान के संदर्भ में उनका मुख्य जोर इस बात पर रहा कि सैन्य कार्रवाई के साथ कूटनीतिक संवाद का रास्ता भी खुला रहना चाहिए।
भारत और पाकिस्तान के संबंध लंबे समय से आतंकवाद, सीमा पार हिंसा और द्विपक्षीय विवादों से प्रभावित रहे हैं। सितंबर 2016 में भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पार आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सितंबर 2026 में इसकी दसवीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए इसे भारत की आतंकवाद-विरोधी नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया था।
अय्यर का बयान ऐसे समय आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत सीमित है, हालांकि दोनों देश शंघाई सहयोग संगठन जैसे बहुपक्षीय मंचों पर हिस्सा लेते रहे हैं। हाल ही में एक भारतीय अधिकारी ने पाकिस्तान में आयोजित SCO कार्यक्रम में भी भाग लिया था।
अय्यर ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के साथ बातचीत बहाल करने की पैरवी की और अटारी-वाघा को संभावित वार्ता स्थल के रूप में सामने रखा। उन्होंने केंद्र की मौजूदा नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि लंबित मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत जारी रहनी चाहिए।
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