जम्मू और कश्मीर

Jammu में भगत ने डोनेशन कैंपेन की गैरमौजूदगी पर प्रश्न उठाया

Payal
5 April 2026 5:49 PM IST
Jammu में भगत ने डोनेशन कैंपेन की गैरमौजूदगी पर प्रश्न उठाया
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Jammu.जम्मू: केंद्रीय राजनेता भगत ने हाल ही में पहलगाम हमले के दौरान कश्मीर क्षेत्र से किसी भी बड़े पैमाने पर डोनेशन कैंपेन न चलाए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल न केवल प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद मुहैया कराती है, बल्कि समाज में सहानुभूति और एकजुटता की भावना को भी मजबूत करती है।
भगत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश के अन्य हिस्सों में ऐसी आपदा या हमले के बाद राहत और सहायता अभियान आमतौर पर तेजी से शुरू कर दिए जाते हैं। लेकिन इस बार कश्मीर से कोई व्यापक डोनेशन अभियान नहीं चला, जिससे प्रभावित लोगों को मदद मिलने में देरी हुई। उन्होंने प्रशासन और स्थानीय संगठनों से पूछा कि आखिर इस दिशा में कदम क्यों नहीं उठाए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि डोनेशन कैंपेन केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं होना चाहिए। इससे प्रभावित लोगों को मानसिक और सामाजिक समर्थन भी मिलता है, जिससे वे संकट के समय अधिक सुरक्षित और आश्वस्त महसूस करते हैं। भगत ने अधिकारियों से आग्रह किया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं के समय तत्काल राहत और सहायता अभियान शुरू किए जाएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डोनेशन अभियान या राहत प्रयास स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशीलता दिखाने का महत्वपूर्ण तरीका हैं। जब जनता इन पहलों में सक्रिय रूप से शामिल होती है, तो प्रभावित लोगों को त्वरित सहायता मिलती है और समाज में सहयोग की भावना बढ़ती है।
भगत ने यह भी बताया कि पहलगाम हमले के बाद कई गैर-सरकारी संस्थाओं और सामाजिक समूहों ने प्रभावित परिवारों की मदद की, लेकिन यह पर्याप्त नहीं था। उनका कहना है कि प्रशासन को स्थानीय नागरिकों और संस्थाओं के साथ मिलकर व्यापक राहत अभियान की योजना बनानी चाहिए थी।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सुरक्षा के मुद्दों के साथ-साथ प्रभावित लोगों को तत्काल आर्थिक और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इससे प्रभावित लोगों की जिंदगी में तेजी से सुधार और राहत संभव हो सकती है।
कुल मिलाकर, भगत ने पहलगाम हमले के दौरान डोनेशन कैंपेन की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाकर प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं को चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं के समय मदद और राहत के अभियान समय पर और व्यापक रूप से चलाए जाएं। उनका कहना है कि इस तरह की पहल से प्रभावित लोगों को तुरंत मदद मिलेगी और समाज में एकजुटता की भावना भी मजबूत होगी।
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