जम्मू और कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत-सेहत का भुगतान 8 महीने से अटका

Kavita2
22 Aug 2026 5:21 PM IST
जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत-सेहत का भुगतान 8 महीने से अटका
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत-सेहत योजना के तहत निजी अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों को मिलने वाला भुगतान पिछले आठ महीनों से लंबित होने का मामला सामने आया है। भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण योजना के तहत पंजीकृत निजी स्वास्थ्य संस्थानों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। निजी अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों के मालिकों के एक समूह ने स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) की बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है।

अस्पताल संचालकों का कहना है कि आयुष्मान भारत-सेहत योजना के तहत मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार क्लेम जमा किए जाते हैं। इन क्लेम के भुगतान में लंबे समय से देरी होने के कारण अस्पतालों की कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ गया है। इससे दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों, कर्मचारियों के वेतन और अस्पताल के रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

आठ महीने से अस्पतालों का भुगतान लंबित

निजी अस्पताल संचालकों के अनुसार, योजना के तहत पंजीकृत अस्पतालों का भुगतान करीब आठ महीने से लंबित है। अस्पतालों का कहना है कि उन्होंने योजना के तहत मरीजों को निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं, लेकिन उनके दावों का भुगतान समय पर नहीं हो सका।

अस्पताल संचालकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार जारी रखना जरूरी है। इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाइयों, सर्जिकल सामान, जांच और अन्य चिकित्सा संसाधनों पर नियमित खर्च होता है। ऐसे में बड़ी राशि के लंबे समय तक अटके रहने से अस्पतालों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होना स्वाभाविक है।

डायलिसिस सेंटरों पर भी बढ़ा दबाव

भुगतान में देरी का असर डायलिसिस सेंटरों पर भी पड़ रहा है। डायलिसिस जैसी नियमित चिकित्सा सेवा में मरीजों को लगातार उपचार की आवश्यकता होती है। सेंटरों को मशीनों के रखरखाव, तकनीकी कर्मचारियों, मेडिकल सामग्री और अन्य संसाधनों पर लगातार खर्च करना पड़ता है।

संचालकों का कहना है कि यदि योजना के तहत मिलने वाला भुगतान लंबे समय तक अटका रहता है तो सेवाओं को सुचारु रूप से जारी रखना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, मरीजों के हित को ध्यान में रखते हुए अस्पताल और डायलिसिस सेंटर अपनी सेवाएं जारी रखने का प्रयास कर रहे हैं।

जिला स्तर के कर्मचारियों की सैलरी भी लंबित

अस्पताल संचालकों ने स्टेट हेल्थ एजेंसी की वित्तीय स्थिति को लेकर एक और गंभीर चिंता जताई है। उनका दावा है कि जिला स्तर पर काम करने वाले स्टेट हेल्थ एजेंसी के कर्मचारियों का वेतन भी पिछले चार महीनों से लंबित है।

यदि योजना के क्रियान्वयन से जुड़े कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलता है, तो इससे योजना के प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि योजना के सुचारु संचालन के लिए अस्पतालों के भुगतान के साथ-साथ एजेंसी के कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी जरूरी है।

स्टेट हेल्थ एजेंसी करती है योजना का संचालन

आयुष्मान भारत-सेहत योजना को जम्मू-कश्मीर में स्टेट हेल्थ एजेंसी के माध्यम से लागू किया जाता है। योजना का उद्देश्य पात्र लोगों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

योजना के तहत सरकारी और पंजीकृत निजी अस्पताल मरीजों को उपचार उपलब्ध कराते हैं। उपचार के बाद अस्पताल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित क्लेम जमा करते हैं। स्वीकृति के बाद अस्पतालों को उपचार की लागत का भुगतान किया जाता है।

निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि क्लेम के भुगतान में लंबा अंतराल रहने से पूरी व्यवस्था पर वित्तीय दबाव बढ़ता है।

अस्पताल मालिकों ने जताई गहरी चिंता

निजी अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों के मालिकों के समूह ने स्टेट हेल्थ एजेंसी की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आठ महीने से भुगतान नहीं मिलने के बावजूद अस्पतालों को अपने कर्मचारियों और संसाधनों का खर्च नियमित रूप से वहन करना पड़ रहा है।

अस्पताल संचालकों ने लंबित भुगतान को जल्द जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी संस्थाओं को लंबे समय तक भुगतान के लिए इंतजार कराने से व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

मरीजों पर असर को लेकर भी चिंता

आयुष्मान भारत-सेहत योजना के लाभार्थियों के लिए सूचीबद्ध निजी अस्पताल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई मरीज इलाज के लिए इन अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। भुगतान में लगातार देरी के कारण यदि अस्पतालों पर वित्तीय दबाव बढ़ता है, तो भविष्य में योजना के तहत मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अस्पताल संचालकों का कहना है कि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए भुगतान व्यवस्था को नियमित करना जरूरी है। खासकर डायलिसिस जैसी नियमित और आवश्यक चिकित्सा सेवाओं के लिए वित्तीय व्यवस्था सुचारु रहना बेहद महत्वपूर्ण है।

समाधान की मांग

निजी अस्पताल संचालकों ने सरकार और स्टेट हेल्थ एजेंसी से लंबित भुगतान के मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि आठ महीने से अटके भुगतान को प्राथमिकता के आधार पर जारी किया जाना चाहिए, ताकि अस्पतालों की वित्तीय स्थिति सामान्य हो सके।

साथ ही जिला स्तर पर स्टेट हेल्थ एजेंसी के कर्मचारियों के चार महीने से लंबित वेतन का भुगतान करने की भी मांग की गई है। अस्पताल संचालकों के मुताबिक, योजना का प्रभावी संचालन तभी संभव है जब मरीजों को सेवाएं देने वाले अस्पतालों और योजना को लागू करने वाले कर्मचारियों, दोनों को समय पर भुगतान मिले।

फिलहाल जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत-सेहत योजना के तहत निजी अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों के आठ महीने से लंबित भुगतान ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वित्तीय चिंता बढ़ा दी है। अस्पताल संचालक जल्द भुगतान की मांग कर रहे हैं, ताकि मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों और योजना का संचालन सुचारु बना रहे।

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