जम्मू और कश्मीर

Amarnath यात्रा बनेगी देश की पहली ‘जीरो-लैंडफिल तीर्थयात्रा’, कचरे से बनेगा संसाधन

Kavita2
10 July 2026 1:16 PM IST
Amarnath यात्रा बनेगी देश की पहली ‘जीरो-लैंडफिल तीर्थयात्रा’, कचरे से बनेगा संसाधन
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Jammu जम्मू: इस साल श्री अमरनाथ जी की वार्षिक तीर्थयात्रा केवल धार्मिक आस्था और श्रद्धा का प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल के रूप में भी सामने आ रही है। यात्रा को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रशासन, संबंधित विभाग और वेस्ट मैनेजमेंट विशेषज्ञ मिलकर इसे देश की पहली ‘जीरो-लैंडफिल तीर्थयात्रा’ बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य है कि लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बावजूद हिमालय के संवेदनशील पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। इसके तहत यात्रा मार्गों और शिविर क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे को केवल निपटाने के बजाय उसे दोबारा उपयोगी संसाधनों में बदला जा रहा है।

एक ग्राम कचरा भी लैंडफिल तक नहीं पहुंचाने का लक्ष्य

स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ डॉ. समीर शर्मा ने बताया कि इस बार अभियान का पूरा ध्यान इस बात पर है कि यात्रा के दौरान निकलने वाला कोई भी कचरा लैंडफिल तक न पहुंचे।

उन्होंने कहा कि कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जा रहा है। जैविक कचरे, प्लास्टिक, पैकेजिंग सामग्री और अन्य अपशिष्ट को अलग-अलग प्रक्रिया के माध्यम से रिसाइकिल या पुन: उपयोग योग्य बनाया जा रहा है।

डॉ. शर्मा के मुताबिक, यात्रा क्षेत्र में कचरा प्रबंधन को केवल सफाई अभियान तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एक स्थायी मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

वाटर ATM और प्लास्टिक कम करने की पहल

यात्रा मार्गों पर प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। इनमें वाटर ATM जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं, ताकि श्रद्धालु बार-बार प्लास्टिक बोतल खरीदने के बजाय पुन: उपयोग योग्य पानी की सुविधा का इस्तेमाल कर सकें।

इससे प्लास्टिक कचरे में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही, श्रद्धालुओं को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

खच्चरों के गोबर से बनेगी बायोगैस

अमरनाथ यात्रा में बड़ी संख्या में खच्चरों का इस्तेमाल होता है। इनसे निकलने वाले गोबर के निपटारे के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, खच्चरों के गोबर को बायोगैस उत्पादन में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे एक तरफ जहां कचरे की समस्या कम होगी, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा का वैकल्पिक स्रोत भी तैयार होगा।

यह पहल पहाड़ी क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने और जैविक अपशिष्ट के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

हिमालयी पर्यावरण को बचाने पर जोर

अमरनाथ गुफा और उसके आसपास का क्षेत्र हिमालयी पारिस्थितिकी के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पर्यावरण पर दबाव बढ़ सकता है।

इसी को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पर्यावरण सुरक्षा को यात्रा प्रबंधन का अहम हिस्सा बनाया है। सफाई व्यवस्था, कचरा संग्रहण, रिसाइक्लिंग और जागरूकता अभियान को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

यात्रियों की भागीदारी भी जरूरी

अधिकारियों का कहना है कि केवल प्रशासनिक प्रयासों से ही यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए श्रद्धालुओं की भागीदारी भी जरूरी है।

यात्रियों से अपील की जा रही है कि वे कचरा निर्धारित स्थानों पर ही डालें, प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करें और पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करें।

देश के लिए बन सकता है मॉडल

अगर अमरनाथ यात्रा को सफलतापूर्वक जीरो-लैंडफिल मॉडल के रूप में लागू किया जाता है, तो यह देश की अन्य बड़ी धार्मिक यात्राओं के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक यात्राओं में बढ़ती भीड़ के बीच पर्यावरण संरक्षण की ऐसी पहल भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

इस बार अमरनाथ यात्रा में आस्था के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। प्रशासन और विशेषज्ञों का लक्ष्य साफ है कि श्रद्धालुओं की सुविधा बनी रहे और हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता भी सुरक्षित रहे।

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