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ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा मजबूत, LoC क्षेत्रों में अभी भी चुनौती बरकरार

Jammu जम्मू: भारत की क्रॉस-बॉर्डर स्ट्राइक “ऑपरेशन सिंदूर” के एक साल पूरे होने के बाद जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को लेकर मिली-जुली तस्वीर सामने आ रही है। एक ओर जहां अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत और स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) से लगे पुंछ, राजौरी और कुपवाड़ा जैसे जिलों में आम नागरिकों के लिए खतरा अभी भी बना हुआ है।
यह ऑपरेशन पिछले साल 6 और 7 मई की रात को किया गया था, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए बड़े आतंकी हमले के बाद की गई जवाबी कार्रवाई थी। उस हमले में बैसरन घास के मैदान में पर्यटकों पर आतंकवादियों ने गोलीबारी की थी, जिसमें 26 आम नागरिकों की मौत हो गई थी। यह घटना हाल के वर्षों में नागरिकों पर हुए सबसे गंभीर हमलों में से एक मानी जाती है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब फोकस सिर्फ जवाबी कार्रवाई पर नहीं, बल्कि रोकथाम और सुरक्षा प्रबंधन को मजबूत करने पर अधिक है। पिछले एक वर्ष में काउंटर-इंसर्जेंसी नेटवर्क को काफी मजबूत किया गया है, खासकर उन इलाकों में जहां से घुसपैठ की आशंका अधिक रहती है।
अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया गया है। इसमें ड्रोन निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम और रियल टाइम इंटेलिजेंस साझा करने जैसी तकनीकों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को भी पहले से बेहतर किया गया है।
हालांकि इन सुधारों के बावजूद LoC से लगे इलाकों में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। पुंछ, राजौरी और कुपवाड़ा जैसे क्षेत्रों में अभी भी घुसपैठ और सीमापार गतिविधियों का खतरा बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बल लगातार इन क्षेत्रों में गश्त और निगरानी बढ़ा रहे हैं, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियां और सीमावर्ती स्थिति के कारण पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना अभी भी कठिन माना जा रहा है।
अंदरूनी इलाकों में शांति और स्थिरता बढ़ने से सामान्य जनजीवन में सुधार हुआ है, लेकिन सीमा से लगे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षा चिंता अब भी बनी हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक स्थायी शांति बनाए रखने के लिए केवल सैन्य उपाय ही नहीं, बल्कि सामाजिक और विकासात्मक प्रयासों की भी आवश्यकता होगी।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सुरक्षा एजेंसियां इसे एक महत्वपूर्ण मोड़ मान रही हैं, जिसने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा रणनीति को नई दिशा दी है। हालांकि, सीमा क्षेत्रों की स्थिति यह संकेत देती है कि चुनौतियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं और सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।





