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हिमाचल प्रदेश
Bilaspur में दो गुटों की झड़प, पुलिस भी पथराव की चपेट में
Gulabi Jagat
28 Sept 2025 12:13 AM IST

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Bilaspur: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के डियारा सेक्टर वार्ड नंबर 8 में बीती रात एक बार फिर पुरानी रंजिश का भूत साकार हो गया। स्थानीय लोगों की सुरक्षा और इलाके की शांति को चुनौती देने वाला यह घटनाक्रम शुक्रवार रात करीब 10 बजे शुरू हुआ और एक घंटे तक लगातार तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
जानकारी के अनुसार, डियारा सेक्टर के दो गुटों के बीच पुरानी रंजिश लंबे समय से चली आ रही थी। छोटी-छोटी नोंक-झोंक अब अचानक हिंसक रूप ले गई। इस दौरान गाली-गलौज, धमकियां और तनावपूर्ण माहौल ने इलाके को दहशत में बदल दिया। सबसे पहले विवाद सिर्फ़ जुबानी शब्दों तक सीमित था, लेकिन देखते ही देखते यह हिंसा में तब्दील हो गया।
स्थानीय सूत्रों ने बताया कि अमित कुमार, कन्नू, कुशल चंद और टकला नामक चार युवक मुख्य रूप से हिंसक घटना में शामिल थे। उन्होंने न केवल एक-दूसरे के खिलाफ बल्कि आसपास मौजूद लोगों पर भी पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसक कदम ने पूरे वार्ड में दहशत फैला दी। आसपास के लोग अपने घरों में बंद हो गए और कोई भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
घटना की गंभीरता को देखते हुए सूचना तुरंत पुलिस तक पहुंची। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन यह हिंसा इतनी अप्रत्याशित और तीव्र थी कि पुलिस भी पथराव की चपेट में आ गई। एक पुलिसकर्मी बाल-बाल बचा, जबकि बाकी जवानों ने खुद को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह पूरी घटना लगभग एक घंटे तक जारी रही। इस दौरान तनाव और भय का माहौल पूरे इलाके में था। घरों की खिड़कियों और दरवाजों पर क़ब्ज़ा कर लोगों ने खुद को अंदर कैद कर लिया। उन्होंने यह भी बताया कि यह झड़प पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नहीं रुकी। हिंसक आरोपी मौके से भाग निकले, जिससे पुलिस और प्रशासन की चुनौती बढ़ गई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के बाद पूरे वार्ड में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है। आरोपी युवकों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इलाके में जल्द से जल्द शांति बहाल की जा सके और स्थानीय लोग सामान्य जीवन में लौट सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे घटनाक्रम स्थानीय रंजिश और आपसी मतभेद के कारण अधिक भड़क जाते हैं। यदि समय रहते मध्यस्थता और समाधान के प्रयास किए जाएं तो हिंसा के जोखिम को कम किया जा सकता है। बिलासपुर प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सतत निगरानी और स्थानीय समुदाय के साथ संवाद बढ़ाया जाएगा।
स्थानीय लोग और प्रशासन इस बात पर सहमत हैं कि डियारा सेक्टर वार्ड नंबर 8 जैसी संवेदनशील जगहों पर पुलिस की सक्रियता और समुदाय के सहयोग की आवश्यकता हमेशा बनी रहे। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा दी जाएगी।
यह घटना हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ समय में बढ़ती हिंसा की चिंताओं को भी उजागर करती है। जबकि राज्य में आमतौर पर शांति और सौहार्द की प्रतिष्ठा रही है, ऐसे मामलों से यह संकेत मिलता है कि छोटे स्तर की रंजिशें भी बड़े संघर्ष में बदल सकती हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की तत्परता और तेज़ प्रतिक्रिया ने बड़ी दुर्घटना टालने में मदद की है।
अंततः, डियारा सेक्टर वार्ड नंबर 8 की यह घटना यह याद दिलाती है कि सामाजिक रंजिश और हिंसा के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और समुदाय के सदस्यों के सहयोग से ही ऐसे संघर्षों को समय रहते रोका जा सकता है और इलाके में शांति सुनिश्चित की जा सकती है।
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