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हिमाचल प्रदेश
नालागढ़ में लड़ाई की जांच के दौरान मिली ग्रेनेड जैसी संदिग्ध वस्तु
Ratna Netam
29 Sept 2026 9:31 PM IST

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सोलन : हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ क्षेत्र में मंगलवार को दो गुटों के बीच हुई मारपीट की जांच के दौरान पुलिस को ग्रेनेड जैसी एक संदिग्ध वस्तु मिली। इसके बाद पुलिस ने माजरा गांव के संबंधित इलाके की घेराबंदी कर दी और बम निरोधक दस्ते की मदद से गहन तलाशी अभियान शुरू किया। मामले में आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं के तहत अलग से केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, घटना नालागढ़ के माजरा गांव की है, जो जोगोंस पुलिस चौकी के अधिकार क्षेत्र में आता है। यहां दो गुटों के बीच किसी बात को लेकर विवाद और मारपीट की सूचना मिली थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर नालागढ़ पुलिस स्टेशन में क्रॉस-FIR दर्ज की गईं।
क्रॉस-FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने घटना से जुड़े तथ्यों और मौके पर मौजूद परिस्थितियों की जांच शुरू की। इसी दौरान पुलिस को एक ऐसी वस्तु मिली जो देखने में ग्रेनेड जैसी लग रही थी। संदिग्ध वस्तु मिलने के बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई और पुलिस ने तुरंत सुरक्षा संबंधी कदम उठाए।
पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए घेराबंदी की और आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया। किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए बम निरोधक दस्ते को भी मौके पर बुलाया गया। इसके बाद विशेषज्ञों की मौजूदगी में क्षेत्र की जांच और तलाशी शुरू की गई।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बरामद वस्तु के वास्तविक स्वरूप की पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद ही होगी। जब तक बम निरोधक दस्ते और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ इसकी जांच पूरी नहीं कर लेते, तब तक इसे ग्रेनेड जैसी संदिग्ध वस्तु के रूप में ही देखा जा रहा है।
बरामदगी के बाद पुलिस ने आर्म्स एक्ट की धारा 25(1)(a) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत अवैध हथियारों और विस्फोटक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच की जाती है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध वस्तु वहां कैसे पहुंची और इसका संबंध मारपीट की घटना से है या नहीं।
जांच टीम दोनों गुटों के सदस्यों से भी पूछताछ कर रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि विवाद के दौरान किसी हथियार या संदिग्ध वस्तु का इस्तेमाल किया गया था या यह वस्तु पहले से ही उस स्थान पर मौजूद थी।
मारपीट के मामले में दर्ज दोनों FIR की जांच अलग-अलग पहलुओं से की जा रही है। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। यदि आसपास CCTV कैमरे उपलब्ध हैं तो उनकी फुटेज की भी जांच की जा सकती है।
संदिग्ध वस्तु मिलने के बाद पुलिस ने पूरे इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरती। आसपास के स्थानों की तलाशी भी ली गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां कोई अन्य संदिग्ध सामग्री या हथियार मौजूद न हो।
बम निरोधक दस्ते के विशेषज्ञों की भूमिका इस जांच में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टीम वस्तु की संरचना, उसके भीतर मौजूद सामग्री और संभावित विस्फोटक क्षमता की जांच करेगी। विशेषज्ञ रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि वह वास्तव में ग्रेनेड था या किसी अन्य प्रकार की वस्तु।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता का माहौल देखा गया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध वस्तु को छूने या उसके पास जाने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचना दें। ऐसे मामलों में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
पुलिस यह भी जांच रही है कि कहीं इस मामले का संबंध किसी पुराने आपराधिक विवाद से तो नहीं है। दोनों गुटों के बीच पहले से कोई रंजिश थी या मंगलवार की लड़ाई अचानक हुई, इस पहलू को भी जांच में शामिल किया गया है।
आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के बाद जांच का दायरा अब केवल मारपीट तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस को अब संदिग्ध वस्तु के स्रोत और संभावित इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी जुटानी होगी।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि वस्तु किसके कब्जे में थी, इसे किस उद्देश्य से रखा गया था और क्या इसका किसी आपराधिक गतिविधि से संबंध है। इसके लिए फॉरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा सकती है।
फिलहाल पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है और बम निरोधक दस्ते की सहायता से तलाशी जारी है। बरामद वस्तु की प्रकृति और उससे जुड़े अन्य तथ्यों के बारे में विशेषज्ञ रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
कुल मिलाकर नालागढ़ के माजरा गांव में दो गुटों की लड़ाई की सामान्य जांच के दौरान मिली ग्रेनेड जैसी संदिग्ध वस्तु ने मामले को गंभीर बना दिया है। पुलिस अब मारपीट और संदिग्ध विस्फोटक सामग्री दोनों पहलुओं की जांच कर रही है और संबंधित लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।
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