हिमाचल प्रदेश

पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन CM सुक्खू ने जताया शोक

Ratna Netam
29 Sept 2026 6:38 PM IST
पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन CM सुक्खू ने जताया शोक
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शिमला : हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का मंगलवार को निधन हो गया। उन्होंने कांगड़ा जिले के अपने पैतृक गांव टियारा में अंतिम सांस ली। वे 87 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रदेश और विशेष रूप से शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास में उनके योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने शोक संदेश में कहा कि मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक सक्रिय रहते हुए हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए काम किया। उन्होंने विशेष रूप से कांगड़ा जिले और शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की भलाई और जनता के हित में किए गए मनकोटिया के कार्यों को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने दिवंगत नेता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने शोक-संतप्त परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति देने की कामना भी की।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम थे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय सेना में सेवाएं दी थीं। सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया और कई दशकों तक प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। वह पांच बार शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। उनका राजनीतिक सफर 1982 में शाहपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत के साथ शुरू हुआ था।
इसके बाद उन्होंने अलग-अलग समय पर कांग्रेस और जनता दल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ काम किया। 1985 में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में शाहपुर सीट जीती, जबकि 1990 में जनता दल के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। 1993 और 2003 में भी उन्होंने शाहपुर से जीत हासिल की। इस तरह उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में पांच बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
मेजर मनकोटिया ने हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारियां संभालीं। उन्हें पर्यटन और नागरिक उड्डयन जैसे विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अलावा उन्होंने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास से जुड़े पदों पर भी काम किया। पर्यटन क्षेत्र को लेकर उनके कार्यकाल में कई मुद्दों और योजनाओं पर काम किया गया।
मेजर मनकोटिया अपनी स्पष्ट और मुखर राजनीतिक शैली के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई बार अपनी पार्टी के नेतृत्व से अलग राय रखी और सार्वजनिक मंचों पर मुद्दे उठाए। उनके राजनीतिक सफर में कई बार दल परिवर्तन भी हुआ, लेकिन शाहपुर और कांगड़ा क्षेत्र में उनकी सक्रियता लंबे समय तक बनी रही।
वर्ष 2007 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। बाद में वह दोबारा कांग्रेस से जुड़े और 2012 के विधानसभा चुनाव में शाहपुर सीट से उम्मीदवार बने। 2017 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए थे, हालांकि उस चुनाव में उन्होंने स्वयं चुनाव नहीं लड़ा।
उनका सार्वजनिक जीवन चार दशकों से अधिक समय तक फैला रहा। इस दौरान वह प्रदेश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का हिस्सा रहे। खासतौर पर कांगड़ा जिले की राजनीति में उनकी अलग पहचान थी। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से बार-बार चुनाव लड़ने और जीत दर्ज करने के कारण क्षेत्र के लोगों के साथ उनका लंबा राजनीतिक संबंध बना रहा।
सेना से राजनीति तक का उनका सफर भी उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 1962 से 1976 तक भारतीय सेना में सेवा की। सेना छोड़ने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और कुछ वर्षों बाद सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
मंगलवार सुबह उनके निधन की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक नेताओं और समर्थकों ने शोक व्यक्त किया। रिपोर्टों के मुताबिक उनका निधन हृदयाघात के बाद हुआ। अंतिम संस्कार परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में किया जाना है। उनके कुछ परिजन विदेश में होने के कारण अंतिम संस्कार की प्रक्रिया उनके लौटने के बाद पूरी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मनकोटिया के निधन को प्रदेश के सार्वजनिक जीवन के लिए क्षति बताया और उनके विकास संबंधी योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि शाहपुर और कांगड़ा के लिए किए गए उनके कार्यों की स्मृति लोगों के बीच बनी रहेगी।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन के साथ हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे एक वरिष्ठ नेता का राजनीतिक सफर समाप्त हो गया। विधायक, मंत्री और पूर्व सैन्य अधिकारी के रूप में उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया और कई दशकों तक प्रदेश की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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