हिमाचल प्रदेश

Sirmaur: भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त कई घराें में घुसा पानी

Sarita
17 Aug 2025 12:59 PM IST
Sirmaur: भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त कई घराें में घुसा पानी
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Sirmaur सिरमौर: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मूसलाधार बारिश के कारण नाहन उपमंडल समेत कई इलाकों से भारी नुकसान की खबरें आ रही हैं। बंद सड़कें, उफनती नदियां और जलमग्न गांवों से लोग परेशान हैं। मातर पंचायत में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे कई हिस्से पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उनके घरों और खेतों में पानी घुस गया है, जिससे उनका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। काला अंब और मोगीनंद इलाकों में जलभराव के कारण रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया है। लोग अपने घरों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं|लेकिन लगातार हो रही बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। भारी बारिश के कारण मारकंडा नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नाहन की तारपीन फैक्ट्री भी इस बारिश की चपेट में आ गई है। पास के नाले का पानी फैक्ट्री परिसर में घुस गया, जिससे वहां भारी नुकसान की आशंका है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूर समय रहते सुरक्षित बाहर आ गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। फैक्ट्री प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन नुकसान का आकलन करने में जुटा है, लेकिन बारिश रुकने तक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद कम ही है।
नाहन उपमंडल में शनिवार रात से शुरू हुई भारी बारिश ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कालाअंब-पांवटा साहिब-देहरादून मार्ग पर खजूरना पुल के पास एक ट्रॉला कीचड़ में फंस गया, जिससे इस व्यस्त मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और यात्री घंटों जाम में फंसे रहे। कई लोग अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए बस का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन बारिश और सड़क की खराब हालत ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बारिश के दौरान इस मार्ग पर अक्सर ऐसी समस्याएँ आती हैं, लेकिन इस बार स्थिति ज़्यादा गंभीर है।
जिले के ग्रामीण इलाकों में हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भर जाने से फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। कई किसानों ने बताया कि उनकी धान, मक्का और सब्जी की फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे उनकी महीनों की मेहनत बर्बाद हो सकती है।
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