हिमाचल प्रदेश

मनाली दौरे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चखा कुल्लू का पारंपरिक स्वाद

Kavita2
7 Oct 2026 3:39 PM IST
मनाली दौरे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चखा कुल्लू का पारंपरिक स्वाद
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मनाली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मनाली दौरे के दौरान प्रशासन की ओर से उनके लिए कुल्लू के पारंपरिक व्यंजनों की विशेष व्यवस्था की गई है। राष्ट्रपति के भोजन में स्थानीय और पारंपरिक अनाज से तैयार कई ऐसे पकवान शामिल किए गए हैं, जो अब धीरे-धीरे आम खानपान से गायब होते जा रहे हैं। प्रशासन ने खास तौर पर स्थानीय स्वाद, पौष्टिकता और हिमाचली परंपरा को ध्यान में रखते हुए भोजन का मेन्यू तैयार किया है।

मंगलवार रात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रात्रि भोजन में गुच्छी की सब्जी, लाल चावल और राजमाह का स्वाद लिया। गुच्छी हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में मिलने वाली एक खास किस्म की मशरूम मानी जाती है और स्थानीय व्यंजनों में इसका विशेष स्थान है। इसके साथ लाल चावल और राजमाह परोसे गए, जो पहाड़ी क्षेत्रों के पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे हैं।

बुधवार सुबह नाश्ते में भी स्थानीय अनाजों को प्रमुखता दी गई। राष्ट्रपति के लिए कुट्टू के आटे का परांठा तैयार किया गया। इसके अलावा काउनी, ओघला और बेसा से बने सूप को भी मेन्यू में शामिल किया गया। प्रशासन की कोशिश रही कि राष्ट्रपति को स्थानीय भोजन के साथ-साथ उन पारंपरिक अनाजों से भी परिचित कराया जाए, जिनका उपयोग पहले पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता था।

राष्ट्रपति के खानपान की पूरी व्यवस्था को विशेष निगरानी में तैयार किया गया। भोजन में स्वाद के साथ स्वास्थ्य और गुणवत्ता का भी ध्यान रखा गया। स्थानीय प्रशासन ने पारंपरिक अनाज और सामग्री के चयन में भी सावधानी बरती।

बुधवार दोपहर के भोजन में भी कुल्लू और आसपास के क्षेत्रों के कई पारंपरिक व्यंजन शामिल रहे। इनमें बाथू की खीर, कच्चा पपीता और खुमानी से तैयार मीठा, तोरी और भिंडी की सब्जी, गुच्छी और रागी का सूप, कद्दू-आंबले की सब्जी और लाल चावल प्रमुख रूप से परोसे गए।

बाथू की खीर को पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजनों में गिना जाता है। स्थानीय स्तर पर इसका उपयोग लंबे समय से होता रहा है, लेकिन बदलती जीवनशैली और आधुनिक खानपान के कारण ऐसे व्यंजन अब कम दिखाई देते हैं।

इसी तरह रागी, काउनी और ओघला जैसे अनाज भी कभी पहाड़ी क्षेत्रों के नियमित भोजन का हिस्सा हुआ करते थे। प्रशासन ने राष्ट्रपति के मेन्यू में इन अनाजों को शामिल कर स्थानीय कृषि और खानपान परंपरा को प्रमुखता देने की कोशिश की है।

गुच्छी और रागी से तैयार सूप भी राष्ट्रपति के भोजन का खास हिस्सा रहा। गुच्छी का इस्तेमाल हिमाचली व्यंजनों में विशेष अवसरों पर किया जाता है। वहीं रागी को पौष्टिक अनाज माना जाता है और पहाड़ी क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल परंपरागत रूप से होता रहा है।

राष्ट्रपति के लिए तैयार किए गए भोजन में अधिक मसालेदार और भारी व्यंजनों के बजाय हल्के और पौष्टिक विकल्पों को प्राथमिकता दी गई। प्रशासन ने कोशिश की कि स्थानीय स्वाद बरकरार रहे और भोजन संतुलित भी हो।

कद्दू और आंबले की सब्जी भी इस विशेष मेन्यू का हिस्सा रही। पहाड़ी व्यंजनों में स्थानीय फलों और सब्जियों का अनोखा इस्तेमाल देखने को मिलता है। आंबले का खट्टापन और कद्दू का स्वाद मिलाकर तैयार होने वाली इस सब्जी को पारंपरिक स्वाद से जोड़ा जाता है।

खुमानी का मीठा भी राष्ट्रपति के दोपहर के भोजन में शामिल किया गया। हिमाचल प्रदेश में खुमानी की खेती कई क्षेत्रों में होती है और स्थानीय लोग इससे विभिन्न प्रकार के व्यंजन तैयार करते हैं।

लाल चावल को राष्ट्रपति के रात्रि और दोपहर दोनों भोजन में शामिल किया गया। स्थानीय स्तर पर उगाए जाने वाले लाल चावल को पारंपरिक पहाड़ी भोजन का हिस्सा माना जाता है।

प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था करते समय इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मेन्यू में स्थानीय पहचान दिखाई दे। इसी वजह से सामान्य व्यंजनों की जगह कुल्लू और हिमाचल के पारंपरिक स्वाद को प्राथमिकता दी गई।

राष्ट्रपति के मनाली दौरे को लेकर सुरक्षा के साथ-साथ आतिथ्य व्यवस्था भी विशेष रूप से की गई है। उनके ठहरने, आवागमन और भोजन की जिम्मेदारी अलग-अलग अधिकारियों को सौंपी गई है।

भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों को भी गुणवत्ता और स्वच्छता के संबंध में विशेष निर्देश दिए गए हैं। इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया पर निगरानी रखी गई।

स्थानीय प्रशासन के लिए यह अवसर हिमाचल की पारंपरिक भोजन संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का भी माना जा रहा है। राष्ट्रपति के मेन्यू में शामिल कई अनाज और व्यंजन ऐसे हैं, जिनका उपयोग अब पहले की तुलना में कम हो गया है।

विशेषज्ञ लंबे समय से पारंपरिक अनाजों को फिर से भोजन में शामिल करने की बात करते रहे हैं। मोटे अनाज और स्थानीय फसलें पोषण के साथ-साथ पहाड़ी कृषि व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

कुल्लू और मनाली क्षेत्र की खानपान परंपरा प्राकृतिक परिस्थितियों और स्थानीय कृषि से गहराई से जुड़ी रही है। यहां के पारंपरिक भोजन में स्थानीय दाल, अनाज, सब्जियां और जंगली उत्पादों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है।

राष्ट्रपति के लिए तैयार इस विशेष मेन्यू में उसी परंपरा की झलक दिखाई दी। प्रशासन ने स्थानीय स्वाद को आधुनिक प्रस्तुति के साथ परोसने की व्यवस्था की।

मनाली दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यक्रमों के साथ उनका पारंपरिक भोजन भी चर्चा का विषय बना हुआ है। खासकर गुच्छी की सब्जी, लाल चावल, राजमाह, बाथू की खीर और कुट्टू के परांठे जैसे व्यंजन लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।

प्रशासन का उद्देश्य केवल राष्ट्रपति को स्थानीय भोजन परोसना नहीं, बल्कि हिमाचल की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को सम्मान देना भी है।

फिलहाल राष्ट्रपति के मनाली प्रवास के दौरान उनके लिए स्थानीय व्यंजनों की यह विशेष व्यवस्था जारी है। कुल्लू के पारंपरिक अनाजों और व्यंजनों से तैयार भोजन ने राष्ट्रपति के दौरे में स्थानीय संस्कृति का खास रंग जोड़ दिया है।

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