हिमाचल प्रदेश

नौटोर जमीन में देरी पर मंत्री जगत सिंह नेगी ने जताई नाराजगी

Ratna Netam
30 Sept 2026 7:55 PM IST
नौटोर जमीन में देरी पर मंत्री जगत सिंह नेगी ने जताई नाराजगी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के राजस्व, बागवानी और जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में नौटोर भूमि आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन के वितरण का मामला नहीं, बल्कि जनजातीय समुदायों के आर्थिक अधिकार, आजीविका और सीमावर्ती क्षेत्रों में आबादी बनाए रखने से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। नेगी ने राज्यपाल कविंदर गुप्ता के स्तर पर मामला लंबे समय से लंबित रहने का मुद्दा उठाते हुए जल्द निर्णय की मांग की।
मंत्री के मुताबिक नौटोर भूमि की मांग को लेकर जनजातीय क्षेत्रों के लोगों ने ‘नौटोर यात्रा’ शुरू की है। उन्होंने कहा कि इसे सिर्फ राजनीतिक आंदोलन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग लंबे समय से पात्रता के आधार पर जमीन आवंटन का इंतजार कर रहे हैं। नेगी का कहना है कि लोगों में बढ़ती चिंता और इंतजार की स्थिति इस आंदोलन के पीछे प्रमुख कारण है।
हिमाचल प्रदेश में नौटोर भूमि की व्यवस्था ‘हिमाचल प्रदेश नौटोर भूमि नियम, 1968’ के तहत संचालित होती है। इन नियमों में सरकारी बंजर भूमि को तय शर्तों के तहत कृषि, बागवानी, पशुपालन और कुछ अन्य उपयोगों के लिए आवंटित करने का प्रावधान है। नियमों में कृषि और बागवानी के लिए अधिकतम सीमा तथा पात्रता से जुड़े मापदंड भी तय किए गए हैं।
नेगी ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सबसे बड़ी अड़चन वन संरक्षण कानून और वन भूमि से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया है। उनका तर्क है कि राज्य सरकार अकेले केंद्रीय कानून को दरकिनार नहीं कर सकती। उन्होंने अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए राज्यपाल से इस मामले में निर्णय लेने की अपील की है। यह मंत्री का संवैधानिक और राजनीतिक पक्ष है; अंतिम कानूनी स्थिति निर्धारित करने का अधिकार संबंधित संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि पूर्व में कुछ अवधियों के दौरान जनजातीय क्षेत्रों में नौटोर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए छूट दी गई थी। उनके अनुसार उस समय कई लंबित मामलों में संयुक्त निरीक्षण और जमीन आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी थी। उन्होंने दावा किया कि बाद के वर्षों में यह प्रक्रिया फिर धीमी पड़ गई, जिससे बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रह गए।
जगत सिंह नेगी का कहना है कि नौटोर भूमि की पात्रता राजनीतिक पहचान से नहीं बल्कि तय नियमों से निर्धारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लाभार्थी कांग्रेस, भाजपा या किसी अन्य राजनीतिक दल से जुड़ा है या नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए। पात्रता का आधार केवल नियम, आर्थिक स्थिति और वास्तविक जरूरत होनी चाहिए।
मंत्री ने जनजातीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीन की उपलब्धता को पलायन से भी जोड़ा। उनका कहना है कि जिन परिवारों के पास खेती या बागवानी के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है, उनके लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर सीमित हो जाते हैं। ऐसे में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों की ओर जाते हैं। नेगी का तर्क है कि योग्य परिवारों को नौटोर भूमि मिलने से बागवानी, खेती और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने सीमावर्ती गांवों में आबादी बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। मंत्री ने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार सीमावर्ती इलाकों से पलायन रोकने और गांवों को मजबूत करने की बात करती है, जबकि दूसरी ओर ऐसे परिवार जो वहीं रहकर खेती और बागवानी करना चाहते हैं, उन्हें भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अटकी हुई है। यह आरोप नेगी ने केंद्र की नीतियों की आलोचना करते हुए लगाया है।
इस मामले पर राज्यपाल कविंदर गुप्ता का पक्ष भी सामने आ चुका है। राज्यपाल ने कहा है कि जनजातीय क्षेत्रों में नौटोर भूमि आवंटन के लिए स्पष्ट, समान और पारदर्शी पात्रता मानदंड होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जमीन उन्हीं पात्र और जरूरतमंद लोगों को दी जानी चाहिए, जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है। राज्यपाल ने लंबित पात्र लोगों की सही संख्या और संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी मांगी है तथा जरूरत पड़ने पर कानूनी राय लेने की बात कही है।
राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम फैसला निर्धारित नियमों, कानूनी स्थिति और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर लिया जाएगा। उन्होंने आंदोलन को लेकर कहा कि लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन निर्णय सभी पहलुओं की जांच के बाद किया जाएगा।
जगत सिंह नेगी इससे पहले भी राज्यपाल से मुलाकात कर जनजातीय क्षेत्रों में नौटोर वन भूमि के आवंटन का मामला उठा चुके हैं। जून में हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने योग्य परिवारों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आग्रह किया था। उस समय भी उन्होंने सीमित भूमि स्वामित्व, बेरोजगारी और पलायन को इस मुद्दे से जोड़ते हुए कहा था कि स्थानीय परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए जमीन महत्वपूर्ण है।
नौटोर नियमों के तहत बागवानी और कृषि के लिए जमीन देने का प्रावधान है, जबकि नियमों में अधिकतम भूमि सीमा भी तय की गई है। हिमाचल के कुछ जनजातीय क्षेत्रों के लिए अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान और अपवाद भी दर्ज हैं।
फिलहाल नौटोर भूमि का मुद्दा राज्य सरकार, राजभवन और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों के बीच महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। एक ओर मंत्री जगत सिंह नेगी जल्द निर्णय की मांग कर रहे हैं, वहीं राज्यपाल ने पात्रता, कानूनी स्थिति और पारदर्शी मानदंड की पूरी जांच के बाद फैसला लेने की बात कही है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि राजभवन इस मामले में आगे क्या निर्णय लेता है और लंबे समय से जमीन आवंटन का इंतजार कर रहे पात्र परिवारों के मामलों पर कब प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
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