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हिमाचल प्रदेश
हिमाचल में 118 करोड़ के उपकर का हिसाब गड़बड़ ऑडिट में बड़ा खुलासा
nidhi
5 Sept 2026 7:49 AM IST

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करोड़ों ऑडिट रिपोर्ट में खुली पोल
शिमला: हिमाचल प्रदेश में दूध उत्पादन, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर जनता से वसूले गए उपकर को लेकर बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट 2024-25 में करीब 118.95 करोड़ रुपये के बिजली और शराब उपकर को निर्धारित सरकारी खातों अथवा संबंधित विभागों तक समय पर नहीं पहुंचाने पर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा आरक्षित निधियों और जमा राशियों पर सरकार की ब्याज देनदारी में भी गड़बड़ी सामने आई है। CAG की यह रिपोर्ट 3 सितंबर 2026 को विधानसभा में पेश की गई।
बिजली से वसूले 27.58 करोड़ रुपये
रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड ने नवंबर 2024 से लागू दूध और पर्यावरण उपकर के तहत वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 27.58 करोड़ रुपये की वसूली की। इसमें 12.65 करोड़ रुपये दूध उपकर और 14.93 करोड़ रुपये पर्यावरण उपकर के रूप में एकत्र किए गए थे। ऑडिट के अनुसार यह राशि राज्य की समेकित निधि में तत्काल जमा होनी चाहिए थी, लेकिन इसे बिजली बोर्ड के चालू खाते में रखा गया। बोर्ड ने अगस्त 2025 में जवाब दिया कि नकदी प्रवाह की कमी के चलते राज्य सरकार द्वारा उसे दी जाने वाली राशि के मुकाबले उपकर को समायोजित किया गया था। ऑडिट ने इस व्यवस्था को संवैधानिक और वित्तीय प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना।
शराब पर वसूले 166.54 करोड़
आबकारी एवं कराधान विभाग ने शराब की बिक्री और निर्यात पर भी अलग-अलग उद्देश्यों के लिए उपकर वसूला। वित्त वर्ष के दौरान विभाग ने कुल 166.54 करोड़ रुपये जुटाए। इसमें 141.92 करोड़ रुपये दूध उपकर और 24.62 करोड़ रुपये प्राकृतिक खेती उपकर शामिल था। लेकिन इस पूरी रकम में से पशुपालन विभाग को केवल 75.17 करोड़ रुपये ही हस्तांतरित किए गए। इस तरह मार्च 2025 तक करीब 91.37 करोड़ रुपये संबंधित लाभार्थी विभागों तक नहीं पहुंचे थे। ऑडिट ने इतनी बड़ी रकम के समय पर हस्तांतरण नहीं होने पर सवाल उठाया है।
118.95 करोड़ रुपये पर उठे सवाल
बिजली उपकर के 27.58 करोड़ और शराब से वसूले गए लेकिन हस्तांतरित नहीं किए गए 91.37 करोड़ रुपये को जोड़ने पर कुल रकम 118.95 करोड़ रुपये होती है। ऑडिट रिपोर्ट में इन्हीं वित्तीय व्यवस्थाओं और राशि के निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा अथवा हस्तांतरण नहीं होने को लेकर गंभीर टिप्पणी की गई है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये उपकर विशेष उद्देश्यों के लिए जनता से वसूले गए थे। दूध उपकर का उद्देश्य पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र से संबंधित गतिविधियों के लिए संसाधन जुटाना था, जबकि प्राकृतिक खेती और पर्यावरण से जुड़े उपकर भी निर्धारित उद्देश्यों के लिए लगाए गए थे।
ब्याज की देनदारी पर भी सवाल
CAG रिपोर्ट में केवल उपकर ही नहीं बल्कि आरक्षित निधियों और जमा राशियों पर ब्याज भुगतान को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। ऑडिट के अनुसार सरकार पर विभिन्न ब्याज वाली जमा एवं आरक्षित निधियों की 101.61 करोड़ रुपये की राशि पर करीब 21.83 करोड़ रुपये का ब्याज देय पाया गया।
ऐसी राशि का सही लेखांकन राज्य की वित्तीय स्थिति की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करने के लिए जरूरी माना जाता है। ब्याज भुगतान या उसकी देनदारी का उचित तरीके से हिसाब नहीं होने पर सरकारी वित्तीय आंकड़ों पर भी असर पड़ सकता है।
विधानसभा में पेश हुई CAG रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त वर्ष 2024-25 से संबंधित राज्य वित्त लेखापरीक्षा प्रतिवेदन को 3 सितंबर 2026 को विधानसभा में रखा गया। CAG के मुताबिक इस रिपोर्ट का उद्देश्य राज्य के वित्तीय प्रदर्शन का आकलन करना और वित्तीय आंकड़ों के ऑडिट विश्लेषण के आधार पर राज्य विधायिका को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना है। रिपोर्ट में सरकारी राजस्व, व्यय, देनदारियों, निधियों और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई है। उपकर के हस्तांतरण और ब्याज की देनदारी से जुड़े निष्कर्ष इसी व्यापक वित्तीय ऑडिट का हिस्सा हैं।
सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर उठे सवाल
हिमाचल पहले से वित्तीय दबाव और बढ़ती देनदारियों जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में विशेष उद्देश्यों के लिए जुटाई गई राशि को निर्धारित खातों और विभागों तक समय पर पहुंचाना महत्वपूर्ण है। CAG की टिप्पणियों ने अब इस प्रक्रिया में जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा मुद्दा शराब पर लगाए गए उपकर का है। 166.54 करोड़ रुपये की वसूली के बावजूद मार्च 2025 तक 91.37 करोड़ रुपये संबंधित लाभार्थी विभागों तक नहीं पहुंचने की बात सामने आई। इसी तरह बिजली बोर्ड से वसूले गए 27.58 करोड़ रुपये को समेकित निधि में तत्काल जमा नहीं किए जाने पर भी ऑडिट ने आपत्ति दर्ज की। अब CAG रिपोर्ट के बाद सरकार और संबंधित विभागों से इन वित्तीय विसंगतियों पर स्थिति स्पष्ट करने और व्यवस्था में सुधार की अपेक्षा होगी। ऑडिट के निष्कर्ष यह भी रेखांकित करते हैं कि किसी विशेष उद्देश्य के नाम पर जनता से वसूली गई रकम का उसी उद्देश्य के लिए समय पर और पारदर्शी तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित करना जरूरी है।
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