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कसोल रेव पार्टी मामला: हिमाचल हाईकोर्ट सख्त, DC-SP तबादला आदेश में राहत नहीं; SIT जांच जारी

Shimla, शिमला । कुल्लू जिले के कसोल में कथित रेव पार्टियों के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती जारी है। अदालत ने इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने डीसी, एसपी और संबंधित एसडीएम के तबादले से जुड़े आदेशों में संशोधन की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया और मामले की सुनवाई तय तारीख से पहले करने से भी इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई निर्धारित समय पर ही होगी। संबंधित अधिकारियों की ओर से अदालत में आवेदन देकर सुनवाई जल्द करने का आग्रह किया गया था, लेकिन पीठ ने इसे स्वीकार नहीं किया।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
कसोल में रेव पार्टियों के आयोजन को लेकर हाईकोर्ट ने पहले ही कड़ा रुख अपनाया था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी वाले आयोजनों की जानकारी स्थानीय प्रशासन की जानकारी के बिना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि प्रशासन की मौन सहमति के बिना इस तरह की गतिविधियां लंबे समय तक नहीं चल सकतीं।
हाईकोर्ट ने इससे पहले आदेश जारी करते हुए कहा था कि यदि एक सप्ताह के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो कुल्लू के डीसी, एसपी और संबंधित एसडीएम के तबादले किए जाएं। अदालत के निर्देश के बाद राज्य सरकार को 24 जून को अधिकारियों के तबादले से संबंधित आदेश दिए गए थे। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को निर्धारित की गई है।
पुलिस रिपोर्ट के बावजूद अनुमति देने पर सवाल
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान 5 जून 2026 की पुलिस रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट में डीएसपी और स्थानीय पुलिस थाना प्रभारी ने बताया था कि रेव पार्टी का आयोजन स्थल घने और सुनसान जंगल क्षेत्र में था। पुलिस ने वहां नशीले पदार्थों के सेवन या तस्करी की आशंका भी जताई थी।
अदालत ने कहा कि इतनी गंभीर रिपोर्ट मिलने के बावजूद अगले ही दिन 6 जून को संबंधित एसडीएम की ओर से तेज संगीत बजाने की अनुमति देना कई सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने एसडीएम की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जाहिर की।
बड़े पैमाने पर चल रहा था आयोजन का कारोबार
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जब किसी आयोजन में हजारों लोगों की भागीदारी हो और प्रति व्यक्ति हजारों रुपये से लेकर लाखों रुपये तक प्रवेश शुल्क लिया जा रहा हो, तो यह केवल सामान्य कार्यक्रम नहीं बल्कि बड़े स्तर का व्यावसायिक संचालन प्रतीत होता है।
अदालत ने कहा कि 4,000 से 5,000 लोगों की क्षमता वाले आयोजनों का बिना स्थानीय प्रशासन की जानकारी के संचालन होना संभव नहीं लगता। कोर्ट ने इस पूरे मामले में एसआईटी जांच के आदेश भी जारी किए हैं, ताकि आयोजन, अनुमति प्रक्रिया और प्रशासनिक भूमिका की जांच की जा सके।
अधिकारियों को नहीं मिली राहत
फिलहाल हाईकोर्ट की सख्ती के चलते डीसी, एसपी और एसडीएम को कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने साफ किया है कि मामले में तय प्रक्रिया के अनुसार ही आगे की सुनवाई होगी।
कसोल क्षेत्र में रेव पार्टियों और नशे से जुड़ी गतिविधियों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि इन आयोजनों के पीछे कौन लोग शामिल थे और प्रशासनिक स्तर पर कहां चूक हुई।





