हिमाचल प्रदेश

अधिकारों और वित्तीय शक्तियों की दी जाएगी जानकारी

Saba Naaz
23 July 2026 7:00 PM IST
अधिकारों और वित्तीय शक्तियों की दी जाएगी जानकारी
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में हाल ही में निर्वाचित पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों, दायित्वों और विकास कार्यों के बेहतर संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से शुरू किए गए इस चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी देना है, ताकि वे अपने कार्यकाल में गांवों के विकास को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ा सकें।

प्रदेश में जिला स्तर पर चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें पंचायतों के संचालन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जा रही है।

वित्तीय शक्तियों की दी जा रही जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों को बजट तैयार करने, पंचायत निधि के सही उपयोग, आय-व्यय का हिसाब रखने और सरकारी अनुदान राशि के पारदर्शी इस्तेमाल की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा 16वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि के उपयोग, ऑनलाइन लेखांकन व्यवस्था और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के संचालन के बारे में भी बताया जा रहा है।

प्रतिनिधियों को यह भी समझाया जा रहा है कि विकास कार्यों के लिए स्वीकृति प्रक्रिया क्या है, भुगतान कैसे किया जाता है और उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर जमा करना क्यों जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि सही वित्तीय प्रबंधन से पंचायतों में भ्रष्टाचार कम होगा और विकास कार्यों में तेजी आएगी।

विकास योजनाओं के संचालन पर जोर

चार दिवसीय प्रशिक्षण में पंचायत प्रतिनिधियों को ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) तैयार करने की प्रक्रिया भी समझाई जा रही है। इसमें सड़क, पेयजल, नाली, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने की जानकारी दी जा रही है।

इसके साथ ही महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कार्यों में पंचायतों की भूमिका पर भी विशेष चर्चा की जा रही है।

प्रशासनिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी

प्रशिक्षण में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 और उससे जुड़े नियमों की जानकारी दी जा रही है। प्रतिनिधियों को ग्राम सभा की बैठक आयोजित करने, प्रस्ताव पारित करने, पंचायत बैठकों का संचालन करने और पंचायत संपत्तियों की सुरक्षा जैसे विषयों से अवगत कराया जा रहा है।

इसके अलावा सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का चयन, पंचायत कर्मचारियों की निगरानी, विकास कार्यों की गुणवत्ता जांच और सामाजिक अंकेक्षण में सहयोग करने की प्रक्रिया भी बताई जा रही है।

3758 ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि होंगे लाभान्वित

प्रदेश में 3758 ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों के साथ पंचायत समितियों और जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों को भी इस प्रशिक्षण में शामिल किया गया है। विशेषज्ञ अधिकारियों और मास्टर ट्रेनरों द्वारा प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि कई बार जानकारी के अभाव में पंचायत स्तर पर प्रशासनिक और वित्तीय गलतियां हो जाती हैं। इस प्रशिक्षण से प्रतिनिधियों को नियमों की बेहतर समझ मिलेगी और वे योजनाओं को सही तरीके से लागू कर सकेंगे।

ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

सरकार का मानना है कि प्रशिक्षित पंचायत प्रतिनिधि गांवों की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझकर विकास योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर पाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों को सरकारी योजनाओं का अधिक लाभ मिल सकेगा।

प्रशिक्षण में प्रतिनिधियों को यह भी बताया जा रहा है कि पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर कर, शुल्क और अन्य संसाधनों का उपयोग कैसे किया जा सकता है। साथ ही परिसंपत्तियों के रखरखाव और समय पर ऑडिट प्रक्रिया पूरी करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

हिमाचल सरकार की इस पहल का उद्देश्य पंचायतों को अधिक मजबूत और सक्षम बनाना है, ताकि गांवों में विकास कार्यों को तेज गति से पूरा किया जा सके और स्थानीय स्तर पर प्रशासन को और प्रभावी बनाया जा सके।

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