हिमाचल प्रदेश

शिमला में मकानों में दरारें IIT रुड़की करेगी जांच

Ratna Netam
22 Sept 2026 9:12 PM IST
शिमला में मकानों में दरारें IIT रुड़की करेगी जांच
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में स्थित शांति विहार के कई मकानों में दरारें आने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। निवासियों का आरोप है कि इलाके के नीचे फोरलेन परियोजना के लिए बनाई जा रही समानांतर सुरंगों के निर्माण के बाद उनके घरों की दीवारों और फर्श पर दरारें दिखाई देने लगीं। हालांकि दरारों का वास्तविक कारण अभी तकनीकी जांच से तय होना बाकी है। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए IIT रुड़की के विशेषज्ञों से वैज्ञानिक और तकनीकी जांच कराने का फैसला किया है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शांति विहार वार्ड के समिट्री से सटे इलाके में करीब 10 मकानों में दरारों की शिकायत सामने आई है। कुछ स्थानीय भवन मालिकों का दावा है कि सुरंग के ऊपर स्थित 12 में से 11 इमारतों में किसी न किसी स्तर पर दरारें दिखाई दी हैं। अलग-अलग निरीक्षणों में प्रभावित भवनों की संख्या अलग बताई गई है, इसलिए प्रशासन अब विस्तृत सर्वे के जरिए सभी प्रभावित ढांचों की सूची तैयार करेगा।
IIT रुड़की की टीम पता लगाएगी असली कारण
शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि IIT रुड़की से विशेषज्ञों की टीम बुलाकर पूरे मामले का तकनीकी आकलन कराया जाएगा। टीम प्रभावित मकानों का निरीक्षण करेगी और यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि दरारें आने की वास्तविक वजह क्या है। इसके साथ ही विशेषज्ञ भविष्य में सुरंग निर्माण को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सावधानियां और तकनीकी उपाय भी सुझाएंगे।यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थानीय लोग सुरंग निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों को मकानों में आई दरारों से जोड़ रहे हैं, जबकि कारण का अंतिम निर्धारण विशेषज्ञ रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।
ब्लास्टिंग की अनुमति निलंबित
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निर्माण कंपनी को दी गई ब्लास्टिंग की अनुमति तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है। NHAI ने बैठक में कहा कि फिलहाल सुरंग निर्माण के लिए ब्लास्टिंग नहीं की जा रही है। इसके बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अनुमति निलंबित रखने का निर्णय लिया।इससे पहले स्थानीय निवासियों की शिकायत के बाद प्रशासन ने निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए थे। लोगों का कहना था कि जब तक मकानों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक सुरंग का काम आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
टनल के ऊपर 100 मीटर क्षेत्र का होगा सर्वे
प्रशासन ने केवल उन मकानों की जांच कराने का फैसला नहीं किया है जिनमें अभी दरारें दिखाई दे रही हैं। ट्विन टनल के ऊपर करीब 100 मीटर के दायरे में आने वाले सभी भवनों का निरीक्षण कर उन्हें सूचीबद्ध करने की योजना बनाई गई है।जांच चरणबद्ध तरीके से होगी। पहले दोनों करीब 11-11 मीटर चौड़ी सुरंगों के ठीक ऊपर स्थित मकानों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद दोनों टनल के बीच के करीब 20 मीटर हिस्से और फिर दोनों तरफ करीब 30-30 मीटर क्षेत्र में स्थित भवनों की जांच की जाएगी।इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल मौजूदा नुकसान का आकलन करना नहीं, बल्कि उन भवनों की भी पहचान करना है जिन्हें भविष्य में किसी तरह का खतरा हो सकता है।
लोगों ने कहा पहले नहीं थीं दरारें
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनके घरों में पहले इस तरह की दरारें नहीं थीं। सुरंग निर्माण रिहायशी क्षेत्र के नीचे पहुंचने के बाद दीवारों और फर्श में दरारें दिखाई देने लगीं। लोगों का आरोप है कि निर्माण गतिविधियों के दौरान होने वाले कंपन से इमारतों को नुकसान पहुंचा है।स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और NHAI के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। उनका कहना है कि मकानों की केवल मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि यह भी प्रमाणित होना चाहिए कि इन इमारतों में रहना सुरक्षित है।कुछ भवन मालिकों ने प्रशासन से IIT इंजीनियरों द्वारा जांच के बाद भवनों के लिए स्टेबिलिटी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग भी की है।
NHAI ने लगाए निगरानी उपकरण
टनल निर्माण के दौरान इलाके में पैदा होने वाले कंपन की निगरानी के लिए NHAI ने उपकरण भी लगाए हैं। प्रभावित क्षेत्र की वीडियोग्राफी की गई है ताकि भवनों की स्थिति का रिकॉर्ड रखा जा सके।इस तरह की निगरानी से यह समझने में मदद मिल सकती है कि निर्माण गतिविधियों के दौरान जमीन में कितना कंपन पैदा हो रहा है और उसका आसपास की इमारतों पर कोई असर पड़ रहा है या नहीं।NHAI के परियोजना निदेशक आनंद कुमार दहिया ने बताया है कि क्षेत्र में टीमें भेजी गई हैं और जमीन को मजबूती देने के लिए ग्राउटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
मरम्मत के बाद PWD करेगा सत्यापन
प्रशासन ने प्रभावित मकानों की मरम्मत के लिए भी प्रक्रिया तय की है। राजस्व विभाग पहले प्रभावित मकानों की पहचान करेगा। इसके बाद निर्माण कंपनी मरम्मत का रोडमैप तैयार कर काम करेगी।मरम्मत पूरी होने के बाद लोक निर्माण विभाग यानी PWD काम की गुणवत्ता और पूर्णता का सत्यापन करेगा। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि केवल दरारों को ऊपर से भरने के बजाय प्रभावित संरचनाओं की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाए।
करीब एक महीने से समस्या की शिकायत
इलाके में कारोबार करने वाले स्थानीय लोगों के अनुसार समस्या करीब एक महीने पहले सामने आनी शुरू हुई थी। दरारें दिखाई देने के बाद संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया।शनिवार को ADM प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी और SDM मंजीत शर्मा की अगुवाई में प्रशासन की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। बाद में उपायुक्त अनुपम कश्यप ने भी मौके पर पहुंचकर भवन मालिकों से बातचीत की।
वैज्ञानिक रिपोर्ट के बाद साफ होगी स्थिति
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि मकानों में दरारें आने का वास्तविक कारण क्या है और सुरंग निर्माण को आगे किस तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है। स्थानीय लोग निर्माण गतिविधियों को जिम्मेदार बता रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय IIT रुड़की से वैज्ञानिक जांच कराने का रास्ता चुना है।विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दरारों और टनल निर्माण के बीच तकनीकी संबंध है या इसके पीछे दूसरे भूवैज्ञानिक या संरचनात्मक कारण भी हैं। रिपोर्ट में सुझाए गए सुरक्षा उपाय आगे के निर्माण और प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल ब्लास्टिंग की अनुमति निलंबित है और प्रभावित भवनों की निगरानी तथा आकलन की प्रक्रिया जारी है।
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