हिमाचल प्रदेश

IGMC-शिमला को इंटीग्रेटेड मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल बनने का मौका

Ratna Netam
6 May 2026 6:57 PM IST
IGMC-शिमला को इंटीग्रेटेड मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल बनने का मौका
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के राजधानी शिमला में स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (IGMC) को जल्द ही इंटीग्रेटेड मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल बनने का अवसर मिल सकता है। राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय की प्राथमिकताएँ इस दिशा में हैं, जिससे माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए विशेष सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।
IGMC-शिमला को यह सम्मान मिलने से अस्पताल में महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष चिकित्सा विभाग, आधुनिक सुविधाएँ और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैयार की जाएगी। इससे न केवल जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य सुधार होगा, बल्कि प्रसूति और नवजात बच्चों से जुड़ी जटिलताओं में भी कमी आएगी।
राज्य स्वास्थ्य मंत्री ने इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “हमारी प्राथमिकता माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च दर्जे का बनाना है। IGMC-शिमला को इंटीग्रेटेड मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल बनने से यहां उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध होंगी और प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अंतर कम होगा।”
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हॉस्पिटल मॉडल से माताओं और नवजात बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। अस्पताल में स्त्री रोग, प्रसूति, नवजात चिकित्सा और पेडियाट्रिक विभाग के विशेषज्ञों की टीम तैनात होगी, जो रोगियों को तत्काल और उन्नत उपचार प्रदान करेगी।
IGMC प्रशासन ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत किया है और कहा कि यह कदम अस्पताल की प्रतिष्ठा और चिकित्सा गुणवत्ता को और बढ़ाएगा। अस्पताल निदेशक ने कहा, “यदि हमें इंटीग्रेटेड मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का दर्जा मिलता है, तो हम प्रदेश के लोगों को विश्वसनीय, सुरक्षित और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कर सकेंगे। यह पहल हिमाचल में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी।”
इस प्रस्ताव से राज्य में माताओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद है। वर्तमान में IGMC-शिमला में प्रसूति और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएँ मौजूद हैं, लेकिन इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल बनने से इन सुविधाओं का दायरा और विशेषज्ञता बढ़ जाएगी।
स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की माताएँ और बच्चे भी बेहतर और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा पाएंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य में स्वास्थ्य जागरूकता और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह के इंटीग्रेटेड मॉडल से अस्पताल में प्रशिक्षण और अनुसंधान की दिशा भी मजबूत होगी। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ नए उपचार और चिकित्सा तकनीकियों में प्रशिक्षित होंगे, जिससे प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और सेवा दोनों का स्तर बढ़ेगा।
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