हिमाचल प्रदेश

हाथों में बर्फ और चेहरे पर मुस्कान, नाना पाटेकर का यादगार शिमला दौरा

nidhi
8 Oct 2026 9:52 AM IST
हाथों में बर्फ और चेहरे पर मुस्कान, नाना पाटेकर का यादगार शिमला दौरा
x
जब शिमला की बर्फबारी देख खुश हो गए थे नाना पाटेकर
शिमला: हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनसे जुड़ी पुरानी यादें एक बार फिर चर्चा में हैं। अपनी दमदार आवाज, बेहतरीन अभिनय और सादगी के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर का हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से जुड़ा एक यादगार प्रसंग भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। यह वह पल था, जब शिमला में बर्फबारी देखकर अभिनेता बेहद खुश हुए थे। हाथों में बर्फ लेकर प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लेते हुए उन्होंने ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त किया था।
नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गोवा में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जहां चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत और प्रशंसकों में शोक की लहर है। नाना पाटेकर अपने गंभीर अभिनय और प्रभावशाली संवाद अदायगी के लिए जाने जाते थे। लेकिन पर्दे पर कठोर और गंभीर किरदार निभाने वाले अभिनेता का निजी जीवन में सरल और सहज व्यक्तित्व भी चर्चा में रहा। शिमला में बर्फबारी से जुड़ा उनका प्रसंग इसी पहलू की याद दिलाता है।
हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता और बर्फ से ढकी वादियां देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। सर्दियों में शिमला का मौसम और बर्फबारी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। नाना पाटेकर की बर्फबारी देखने की खुशी से जुड़ी याद भी प्रकृति के प्रति उनके लगाव को दर्शाती है। अभिनेता के बारे में सामने आए इस प्रसंग में उनके हाथों में बर्फ लेने और ईश्वर को धन्यवाद देने का उल्लेख है। हालांकि, इस घटना की सटीक तारीख और इससे संबंधित मूल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
नाना पाटेकर का फिल्मी सफर कई दशकों तक चला। उन्होंने अपने अभिनय से हिंदी और मराठी सिनेमा में अलग पहचान बनाई। फिल्म 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'तिरंगा', 'प्रहार', 'अब तक छप्पन', 'वेलकम' और मराठी फिल्म 'नटसम्राट' में उनके अभिनय को विशेष सराहना मिली।
फिल्म 'क्रांतिवीर' में उनके संवाद और अभिनय को दर्शक आज भी याद करते हैं। वहीं, 'वेलकम' जैसी कॉमेडी फिल्म में उनके अलग अंदाज ने यह साबित किया कि वह गंभीर भूमिकाओं के साथ हास्य किरदार भी बखूबी निभा सकते थे। अभिनय के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित कई सम्मान मिले। वर्ष 2013 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। नाना पाटेकर अभिनय के अलावा सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। किसानों की सहायता और ग्रामीण समस्याओं को लेकर किए गए कार्यों के कारण भी उनकी पहचान बनी। उन्होंने नाम फाउंडेशन के माध्यम से सामाजिक गतिविधियों में योगदान दिया। उनके निधन के बाद सिनेमा जगत से जुड़े लोग उनकी फिल्मों, संवादों और जीवन के यादगार पलों को याद कर रहे हैं। शिमला की बर्फबारी से जुड़ी उनकी खुशी का प्रसंग भी उन स्मृतियों में शामिल है, जो पर्दे के पीछे उनके सहज व्यक्तित्व की झलक दिखाता है।
Next Story