हिमाचल प्रदेश

HRTC कर्मचारियों की चेतावनी 8 अक्टूबर से थम सकती हैं बसें

Ratna Netam
6 Oct 2026 5:59 PM IST
HRTC कर्मचारियों की चेतावनी 8 अक्टूबर से थम सकती हैं बसें
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शिमला। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) के ड्राइवर और कर्मचारी यूनियन ने मंगलवार को प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और कर्मचारियों की लंबित मांगों पर फैसला नहीं हुआ, तो बस सेवाएं ठप की जा सकती हैं। यूनियन ने 8 अक्टूबर से चक्का जाम की चेतावनी दी है। हालांकि स्थानीय रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि 8 अक्टूबर को चंबा और 9 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में बस संचालन रोकने की योजना बताई गई है।
शिमला में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मानसिंह ठाकुर ने कहा कि चंबा में तैनात एक HRTC अधिकारी पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और कर्मचारियों से पैसे मांगने के आरोप हैं। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में प्रबंधन को लिखित शिकायत और दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यूनियन ने संबंधित अधिकारी को पद से हटाने और पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
मानसिंह ठाकुर ने कहा कि शिकायत के बाद जांच कराने का आश्वासन दिया गया था और रिपोर्ट भी तैयार की गई, लेकिन कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। उनके मुताबिक कर्मचारियों में इसी वजह से नाराजगी बढ़ी है। यूनियन का आरोप है कि चंबा में संबंधित अधिकारी कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार कर रहे हैं और उनसे पैसे मांगने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।
यूनियन ने कहा कि कर्मचारियों ने पहले शांतिपूर्ण तरीके से अपनी शिकायत प्रबंधन के सामने रखी थी। इसके बाद गेट मीटिंग, नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन के जरिए भी मामले पर कार्रवाई की मांग की गई। यूनियन का दावा है कि कई सप्ताह बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिसके कारण अब आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया है।
मानसिंह ठाकुर ने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा तक कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारी बसों को सड़कों से हटाने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि इसकी जिम्मेदारी निगम प्रबंधन की होगी। यूनियन का मानना है कि यदि आरोपों की जांच हो चुकी है तो रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों में भरोसा बना रहे।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों की दूसरी लंबित मांगें भी उठाई गईं। यूनियन ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में कर्मचारियों के वेतन से GPF की कटौती तो की जा रही है, लेकिन राशि समय पर खातों में जमा नहीं हो रही। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक यूनियन ने पिछले तीन महीनों से GPF जमा नहीं होने का आरोप लगाया है।
HRTC में कर्मचारी संगठनों और प्रबंधन के बीच वेतन, ओवरटाइम भत्ता, मेडिकल बिल और दूसरी सेवा संबंधी मांगों को लेकर पहले भी टकराव सामने आ चुका है। जून 2026 में भी कर्मचारियों ने चक्का जाम की चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार के साथ बैठक और कुछ मांगों पर सहमति बनने के बाद प्रस्तावित हड़ताल वापस ले ली गई थी। उस समय ओवरटाइम भत्ता, मेडिकल भुगतान और अन्य कर्मचारी लाभों को लेकर सहमति बनने की बात कही गई थी।
मौजूदा विवाद का केंद्र फिलहाल चंबा में तैनात अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोप हैं। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों ने जांच में सहयोग किया और प्रबंधन को प्रमाण भी उपलब्ध कराए, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई में देरी हो रही है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
चंबा में पिछले महीने भी कर्मचारियों ने इसी मामले को लेकर प्रदर्शन किया था। तब कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि अधिकारी के खिलाफ शिकायत के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारियों ने कार्यशाला परिसर में नारेबाजी की थी और प्रबंधन को कार्रवाई के लिए समय सीमा दी थी।
अब शिमला में हुए प्रदर्शन के बाद मामला प्रदेश स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अगर यूनियन अपनी चेतावनी पर अमल करती है तो HRTC की बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हिमाचल प्रदेश में HRTC सार्वजनिक परिवहन का प्रमुख साधन है और राज्य के पहाड़ी तथा दूरदराज इलाकों में बड़ी संख्या में लोग इसकी बस सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
ऐसी स्थिति में चक्का जाम से दैनिक यात्रियों, छात्रों, कर्मचारियों और पर्यटकों को परेशानी हो सकती है। हालांकि अभी यूनियन की ओर से अंतिम कार्रवाई प्रबंधन के फैसले पर निर्भर बताई गई है।
यूनियन अध्यक्ष मानसिंह ठाकुर ने कहा कि उनका उद्देश्य बस सेवा बंद करना नहीं, बल्कि कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान कराना है। उन्होंने मांग की कि भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जाए और कर्मचारियों की लंबित मांगों पर समयबद्ध फैसला लिया जाए।
फिलहाल HRTC प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले एक-दो दिन में प्रबंधन और यूनियन के बीच बातचीत होती है या नहीं, इस पर नजर रहेगी। यदि समझौता नहीं हुआ तो 8 और 9 अक्टूबर से बस सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ सकती है।
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