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हिमाचल प्रदेश
Himachal: भविष्य में बुनाई उद्योग को बचाने के लिए कदम आवश्यक
Payal
22 April 2026 3:57 PM IST

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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: बुनाई और हथकरघा उद्योग से जुड़े संगठन भुट्टिको के प्रमुख ने देशभर में बुनकरों की संख्या में लगातार गिरावट की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कारीगर धीरे-धीरे इस पेशे को छोड़ रहे हैं, जिससे भारत की सांस्कृतिक और औद्योगिक विरासत खतरे में है।
भुट्टिको प्रमुख ने बताया कि आर्थिक अस्थिरता, कम मुनाफा, आधुनिक तकनीक और युवा पीढ़ी में पेशे के प्रति घटती रुचि बुनकरों की संख्या कम होने के मुख्य कारण हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय पर उपाय नहीं किए गए तो देश में पारंपरिक बुनाई और हथकरघा उद्योग के अस्तित्व पर संकट आ सकता है।
उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थानों से अपील की कि वे बुनकरों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, और बाजार उपलब्ध कराने के लिए नई योजनाएं और नीति बदलाव लागू करें। उनका कहना है कि इससे बुनकर अपने पेशे में टिक सकेंगे और युवा पीढ़ी को भी इस क्षेत्र में अवसर मिलेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बुनाई और हथकरघा उद्योग न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है। पारंपरिक डिज़ाइन, रंग और तकनीक आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत के रूप में संरक्षित रहनी चाहिए।
भुट्टिको प्रमुख ने सुझाव दिया कि डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से बुनकरों के उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। इसके साथ ही प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को इस क्षेत्र में लुभाया जा सकता है।
स्थानीय बुनकरों ने भी इस गिरावट पर चिंता जताई। उनका कहना है कि कम मुनाफा और बाजार तक सीमित पहुंच के कारण कई बुनकर अपने पेशे को छोड़कर अन्य कामों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने सरकार और संगठनों से आग्रह किया कि इस क्षेत्र को आर्थिक और तकनीकी मदद दी जाए।
कुल मिलाकर, भुट्टिको प्रमुख की चेतावनी पारंपरिक बुनाई उद्योग और कारीगरों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो देश की हथकरघा और बुनाई विरासत गंभीर संकट का सामना कर सकती है। इसके समाधान के लिए सरकारी नीतियों, आर्थिक मदद और युवाओं को इस क्षेत्र में जोड़ने के कदम समय की मांग हैं।
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