हिमाचल प्रदेश

Himachal प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चेतावनी

Payal
11 April 2026 1:44 PM IST
Himachal प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चेतावनी
x
Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: नारकंडा में ओवरफ्लो हो रहे जहरीले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाई। कोर्ट ने एसटीपी की लापरवाही को गंभीर माना और बोर्ड को निर्देश दिए कि वह तत्काल इस मामले में उचित कदम उठाए।
कोर्ट ने कहा कि एसटीपी का ठीक से संचालन न होना स्थानीय जल स्रोतों, पर्यावरण और नागरिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्पष्ट जवाब तलब किया कि इस स्थिति को सुधारने के लिए कौन से उपाय किए जा रहे हैं और कब तक इसे ठोस रूप से ठीक किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर एसटीपी की गड़बड़ी से पर्यावरणीय नुकसान या मानव स्वास्थ्य पर असर हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने अधिकारियों को चेताया कि किसी भी तरह की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए कि वे नारकंडा एसटीपी की नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत सुनिश्चित करें। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि बोर्ड को स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर एक विस्तृत रिपोर्ट और समाधान योजना प्रस्तुत करनी होगी। इसमें एसटीपी के सही संचालन, अपग्रेडेशन और सुरक्षा उपायों का पूरा विवरण होना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे जहरीले एसटीपी के ओवरफ्लो से नदियों और पानी की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इससे न केवल पर्यावरणीय संकट पैदा होता है बल्कि स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इसलिए, उचित निगरानी और समय पर कार्रवाई अनिवार्य है।
स्थानीय प्रशासन ने कहा कि एसटीपी की स्थिति को सुधारने के लिए तुरंत तकनीकी और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बोर्ड और प्रशासन समन्वय में प्लांट के अपग्रेडेशन और निगरानी के लिए त्वरित कदम उठा रहे हैं।
कोर्ट की फटकार ने यह संदेश दिया है कि हिमाचल में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर किसी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाएगी। अधिकारियों को एसटीपी के संचालन में गंभीरता दिखाने और समयबद्ध सुधार करने के लिए मजबूर किया गया है।
इस मामले ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि निगरानी और जवाबदेही के बिना पर्यावरणीय सुरक्षा संभव नहीं है। कोर्ट ने बोर्ड को चेताया कि अगर सुधारात्मक कदम जल्द नहीं उठाए गए, तो कानूनी कार्रवाई और जुर्माने का रास्ता खुला रहेगा।
Next Story