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हिमाचल प्रदेश
LoP Jai Ram ने बागी विधायकों के पेंशन आदेश की तारीफ की
Ratna Netam
11 April 2026 12:38 PM IST

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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के लीडर ऑफ़ अपोज़िशन (LoP) जय राम ठाकुर ने हाल ही में बागी विधायकों के लिए जारी पेंशन आदेश की खुले तौर पर तारीफ की है। उन्होंने इस निर्णय को लोकतंत्र और विधायिका के सिद्धांतों के अनुरूप बताया और कहा कि यह आदेश बागी विधायकों के हितों की रक्षा करता है। जय राम ठाकुर ने कहा कि सुखू सरकार का संबंधित कानून असंवैधानिक है और इसे लागू करना लोकतांत्रिक मानदंडों के खिलाफ जाता है।
जय राम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि बागी विधायकों को मिलने वाली पेंशन का आदेश न्यायसंगत और संवैधानिक है। उनका कहना था कि विधायकों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया और उन्हें संविधान के तहत मिलने वाले अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह आदेश राज्य के लोकतंत्र और विधायिका की गरिमा को बनाए रखने के लिए जरूरी है।
सुखू सरकार ने पहले एक कानून लागू किया था, जिसके तहत बागी विधायकों की पेंशन रोकने का प्रावधान किया गया था। जय राम ने इसे संविधान के खिलाफ बताया और कहा कि यह कानून विधायकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी विधायक को उनकी सेवा के अनुसार मिलने वाला सम्मान और पेंशन नहीं रोकना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एलओपी जय राम का यह बयान राज्य में राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकता है। उनका कहना है कि बागी विधायकों के पक्ष में यह बयान सुखू सरकार के खिलाफ विपक्ष को मजबूत करने का एक राजनीतिक कदम भी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा न केवल राजनीतिक महत्व रखता है बल्कि राज्य में शासन और न्यायपालिका के संतुलन के दृष्टिकोण से भी अहम है।
विधायकों के हितों और पेंशन से जुड़ा यह विवाद पिछले कुछ महीनों से चल रहा है। सरकार ने दावा किया था कि बागी विधायकों के खिलाफ यह कदम राज्य के संसाधनों और बजट की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। लेकिन एलओपी जय राम ने इसे केवल राजनीतिक प्रतिशोध और संवैधानिक उल्लंघन के रूप में देखा।
जय राम ने कहा कि भविष्य में भी वे सुनिश्चित करेंगे कि विधायकों के अधिकारों और पेंशन का उल्लंघन न हो। उन्होंने जनता से अपील की कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और विधायिका के महत्व को समझें और इस मामले में संवैधानिक मूल्यों का समर्थन करें। उनके अनुसार, बागी विधायकों के पेंशन को लेकर यह निर्णय न केवल उनके लिए न्यायसंगत है, बल्कि राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए भी मील का पत्थर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एलओपी का यह बयान राज्य में विपक्ष की भूमिका को मजबूत करता है और सरकार के लिए संवैधानिक दावों के आधार पर चुनौती पेश कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला विधानसभा में विधायकों के अधिकार और पेंशन से जुड़े अन्य मामलों में भी निर्णायक साबित हो सकता है।
इस तरह, हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बागी विधायकों के पेंशन आदेश को लेकर जारी यह विवाद अब संवैधानिक, राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। एलओपी जय राम ठाकुर का स्पष्ट रुख इसे और तेज कर रहा है और राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे में एक नया राजनीतिक मोड़ ला रहा है।
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