हिमाचल प्रदेश

Himachal: परवाणू में शराब बनाने वाली कंपनी सील

Sarita
3 Jun 2025 8:21 AM IST
Himachal: परवाणू में शराब बनाने वाली कंपनी सील
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Himachalहिमाचल: प्रदेश के सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र परवाणू के सेक्टर 5 में शराब बनाने वाली एक कंपनी को सील कर दिया गया है। इस कंपनी में हरियाणा राज्य की कंपनियों के लिए शराब बनाई जा रही थी। हैरानी की बात यह है कि कंपनी का लाइसेंस अप्रैल से रिन्यू नहीं हुआ था, यानी यह कंपनी बिना लाइसेंस के शराब बना रही थी। राज्य कर एवं आबकारी विभाग की प्रवर्तन टीम ने सोमवार को केएम डिस्टलरी कंपनी पर छापा मारा। राज्य कर एवं आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त (प्रवर्तन) उज्ज्वल राणा के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम ने यह छापेमारी की।
इस दौरान कंपनी में 9 हजार बल्क लीटर ईएनए (एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल जिससे शराब बनाई जाती है) का स्टॉक कम पाया गया। इससे साफ है कि इस ईएनए का इस्तेमाल हरियाणा राज्य की शराब कंपनी के लिए शराब बनाने में किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान यह मामला सामने आने के बाद जब कंपनी की गहनता से जांच की गई तो विभाग की टीम को कई चौंकाने वाले दस्तावेज मिले। कंपनी के अंदर से हरियाणा राज्य के 48 हजार होलोग्राम बरामद किए गए, जो शराब की बोतलों के ऊपर इस्तेमाल किए जाते हैं। इतना ही नहीं, कंपनी के अंदर से पानीपत की एक शराब कंपनी के संतरा ब्रांड के 7000 लेबल भी बरामद किए गए।
इसके अलावा इस छापेमारी के दौरान ट्रैक एंड ट्रेस के 40000 स्टिकर भी बरामद किए गए। मामला सामने आने के बाद विभाग ने कंपनी को सील कर दिया है। इससे पहले इस टीम ने कालाअंब में भी ऐसा ही मामला पकड़ा था। विभाग को सूचना मिली थी कि परवाणू में चल रही शराब कंपनियां पड़ोसी राज्यों के लिए शराब का उत्पादन कर रही हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए विभाग की प्रवर्तन टीम ने ऐसी कंपनियों के खिलाफ छापेमारी शुरू कर दी है।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त (प्रवर्तन) उज्ज्वल राणा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि परवाणू के सेक्टर 5 स्थित शराब कंपनी केएम डिस्टलरी को सील कर दिया गया है। कंपनी हरियाणा राज्यों की शराब कंपनियों के लिए शराब का उत्पादन कर रही थी। कंपनी से हरियाणा राज्य के 48 हजार होलोग्राम बरामद किए गए। पानीपत की एक शराब कंपनी के संतरा ब्रांड के 7 हजार लेबल के साथ ट्रैक एंड ट्रेस के 40 हजार स्टिकर मिले हैं।
कंपनी में 9 हजार बल्क लीटर ईएनए स्टॉक भी कम मिला है। इससे साफ है कि इसका इस्तेमाल दूसरे राज्यों में बनने वाली शराब में किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी का लाइसेंस भी अप्रैल में ही खत्म हो चुका था। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद कंपनी को सील कर दिया गया है।
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