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हिमाचल सरकार की लोगों से अपील, खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें, मानसून में मृतकों की संख्या 15 पहुंची

Shimla : हिमाचल प्रदेश सरकार ने सोमवार को निवासियों और पर्यटकों से अपील की कि वे मॉनसून के मौसम में गैर-ज़रूरी यात्रा से बचें और मौसम संबंधी सलाहों का सख्ती से पालन करें। राज्य में बादल फटने, अचानक बाढ़ (flash floods), भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान जैसी बारिश से जुड़ी कई आपदाएं हो रही हैं।
हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) और पूरी आपदा प्रबंधन मशीनरी चौबीसों घंटे काम कर रही है ताकि जान-माल का नुकसान कम से कम हो और आपातकालीन स्थितियों में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
राणा ने कहा, "हमने इस मॉनसून सीज़न में कई दुखद घटनाएं देखी हैं। इनमें सबसे दिल दहला देने वाली घटना 13 लोगों की मौत थी, जो यात्रा के दौरान आपदा की चपेट में आ गए थे। कांगड़ा और राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही घटनाएं हुई हैं, जिनसे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।"
उन्होंने कहा कि उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की नौ घटनाएं, लगभग 19 बार अचानक बाढ़ (flash floods) और बादल फटने से प्रभावित चार प्रमुख स्थान दर्ज किए गए हैं, जबकि भारी बारिश और भूस्खलन के कारण 120 से अधिक सड़कें बंद हैं। राज्य के कई हिस्सों में पीने के पानी की आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
उन्होंने आगे कहा, "अब तक, मौजूदा मॉनसून सीज़न के दौरान लगभग 15 से 16 लोगों की जान जा चुकी है। हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता जान-माल का नुकसान कम से कम करना है। मीडिया के माध्यम से, मैं सभी से अपील करता हूं कि वे खराब मौसम में गैर-ज़रूरी यात्रा से बचें और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी सलाहों का सख्ती से पालन करें। ये सावधानियां जान-माल के नुकसान को रोकने में मदद कर सकती हैं।"
राणा ने कहा कि नुकसान का व्यापक आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में समय लगता है क्योंकि अधिकारियों को रिकवरी का आकलन पूरा करना होता है और पुनर्निर्माण के लिए विस्तृत अनुमान तैयार करने होते हैं।
उन्होंने कहा, "हमारे शुरुआती अनुमान से पता चलता है कि मॉनसून के कारण पूरे हिमाचल प्रदेश में लगभग ₹800 करोड़ से ₹1,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। विस्तृत आकलन किया जा रहा है, जिसके बाद एक व्यापक ज्ञापन तैयार किया जाएगा। हम राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF), केंद्र सरकार की सहायता और अन्य उपलब्ध फंडिंग तंत्रों के माध्यम से वित्तीय सहायता मांगेंगे।" स्पेशल सेक्रेटरी ने कहा कि SDRF टीमों और ज़िला प्रशासन समेत आपदा से निपटने वाली एजेंसियों को पूरे राज्य में हाई अलर्ट पर रखा गया है। राज्य और ज़िला दोनों स्तरों पर इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर, बदलती स्थिति पर नज़र रखने और राहत कार्यों में तालमेल बिठाने के लिए 24x7 काम कर रहे हैं।
डॉ. राणा ने कहा, "पूरे आपदा प्रबंधन सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया गया है। हम चौबीसों घंटे स्थिति पर नज़र रख रहे हैं। जब भी किसी घटना की सूचना मिलती है, तो तुरंत कार्रवाई की जाती है। सभी फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तुरंत कार्रवाई करें, संबंधित ज़िला मजिस्ट्रेट को सूचित करें और यह सुनिश्चित करें कि प्रभावित लोगों को बिना किसी देरी के सभी ज़रूरी मदद मिले।"
उन्होंने कहा कि ज़िला प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे बारिश से जुड़ी आपदाओं से प्रभावित लोगों को हर संभव मदद दें और समय पर बचाव, राहत और ज़रूरी सेवाओं को बहाल करना सुनिश्चित करें।
राज्य सरकार ने लोगों से बार-बार अपील की है कि वे भारी बारिश के दौरान सतर्क रहें, नदियों, नालों और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की आशंका वाले इलाकों के पास जाने से बचें, और मौसम की आधिकारिक जानकारी व आपदा से जुड़ी सलाहों से अपडेट रहें, क्योंकि हिमाचल प्रदेश में मॉनसून अभी भी सक्रिय है।





