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Himachal: राजधानी शिमला के संजौली क्षेत्र में शुक्रवार को जुम्मे की नमाज को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया। स्थानीय लोगों और देवभूमि संघर्ष समिति से जुड़े सदस्यों ने मस्जिद में बाहरी मुस्लिम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी। इस दौरान मस्जिद के बाहर दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई, हालांकि स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पहले से तैनात पुलिस बल ने समय रहते हस्तक्षेप किया। बता दें कि संजौली मस्जिद को नगर निगम आयुक्त और जिला अदालत पहले ही अवैध घोषित कर चुके हैं।
विवाद के बाद निगम आयुक्त ने मस्जिद को गिराने के आदेश जारी किए थे। आदेशों के अनुपालन में मस्जिद की ऊपरी 2 मंजिलें पहले ही तोड़ी जा चुकी हैं। वहीं शेष 3 मंजिलों को हटाने के लिए जिला अदालत ने एक महीने की समय सीमा निर्धारित की है। इस विवाद को देखते हुए मस्जिद के बाहर और संजौली बाजार में काफी संख्या में पुलिस जवान तैनात रहे। हालांकि शिमला के मुस्लिमों को मस्जिद के भीतर जाने से नहीं रोका गया।स्थानीय महिलाओं ने बताया कि पिछले वर्ष भी मस्जिद में बाहरी लोगों की आवाजाही से कालोनी में तनाव पैदा हुआ था। आरोप है कि कुछ लोग आसपास के घरों में झांकते थे, जिससे महिलाएं और परिवार असुरक्षित महसूस कर रहे थे। इसी कारण स्थानीय लोग बाहरी राज्यों के व्यक्तियों के मस्जिद में प्रवेश का विरोध कर रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि वही स्थिति दोबारा न बने, इसलिए वे पहले से सतर्क हैं।
विवाद को देखते हुए संजौली मस्जिद परिसर और बाजार क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा कर शांत किया और किसी भी अप्रिय घटना को होने से रोका। फिलहाल क्षेत्र में माहौल शांत बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस सतर्क बनी हुई है।संजौली मस्जिद विवाद में लगातार सुनवाई चलती रही और कुल 50 से अधिक बार कोर्ट में मामले पर बहस हुई। 5 अक्तूबर 2024 को आयुक्त कोर्ट ने मस्जिद की 3 मंजिलें हटाने की अनुमति दी। इसके खिलाफ दायर याचिका को 30 नवम्बर, 2024 को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। उसके बाद 3 मई, 2025 को एमसी आयुक्त कोर्ट ने 2 और मंजिलें गिराने का आदेश दिया, जिसे वक्फ बोर्ड ने 17 मई को जिला अदालत में चुनौती दी। 19 मई की सुनवाई में अदालत ने मस्जिद कमेटी से रिकॉर्ड तलब किया और 23 मई को एमसी को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के आदेश दिए।
26 मई को अदालत ने मस्जिद तोड़ने पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसे 29 मई की सुनवाई में बरकरार रखा गया। 11 जुलाई को केस को बहस योग्य माना गया और 8 व 21 अगस्त को वक्फ बोर्ड ने बहस के लिए समय मांगा। 6 सितम्बर को करीब सवा 2 घंटे तक दोनों पक्षों में जोरदार बहस हुई। उसके बाद मामला 30 अक्तूबर के लिए सूचीबद्ध किया गया और अदालत ने अपना फैसला सुना दिया।
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