हिमाचल प्रदेश

500 ML पानी की बोतल पर प्रतिबंध को लेकर हाईकोर्ट की बड़ी स्पष्टता

Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 5:17 PM IST
500 ML पानी की बोतल पर प्रतिबंध को लेकर हाईकोर्ट की बड़ी स्पष्टता
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में 500 मिलीलीटर तक की प्लास्टिक पानी की बोतलों के इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध को लेकर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है। अदालत के स्पष्टीकरण के अनुसार, इन बोतलों पर प्रतिबंध सरकारी कार्यक्रमों और सरकारी होटलों से संबंधित है। निजी होटलों में आम जनता के लिए आयोजित कार्यक्रमों और गैर-सरकारी आयोजनों में ऐसी बोतलों के इस्तेमाल पर इस आदेश के आधार पर रोक नहीं मानी जाएगी। अदालत की इस स्पष्टता से निजी होटल संचालकों, पर्यटन कारोबारियों और निजी समारोह आयोजित करने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक कचरे को कम करने के उद्देश्य से 500 मिलीलीटर तक की पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) पानी की बोतलों के उपयोग पर प्रतिबंध संबंधी अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना के दायरे को लेकर निजी होटल कारोबार से जुड़े लोगों के बीच असमंजस की स्थिति थी।अब हाईकोर्ट के स्पष्टीकरण के बाद सरकारी और निजी आयोजनों के बीच अंतर को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हुई है।
सरकारी कार्यक्रमों में जारी रहेगा प्रतिबंध
अदालत के स्पष्टीकरण के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा आयोजित आधिकारिक कार्यक्रमों, बैठकों और सम्मेलनों में निर्धारित श्रेणी की छोटी पीईटी पानी की बोतलों पर प्रतिबंध लागू रहेगा।इसमें सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और अन्य सरकारी संस्थाओं के आयोजन शामिल हैं। सरकारी स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में प्लास्टिक की छोटी बोतलों के स्थान पर पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने पर जोर दिया गया है।राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे आयोजनों में एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक सामग्री की खपत कम करना है।सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थाओं में पानी उपलब्ध कराने के लिए कांच की बोतलों, पानी के डिस्पेंसर और अन्य टिकाऊ व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
निजी कार्यक्रमों को लेकर अदालत ने दी स्पष्टता
हाईकोर्ट के स्पष्टीकरण का महत्वपूर्ण पहलू निजी आयोजनों से संबंधित है।अदालत के अनुसार, निजी होटलों में आम नागरिकों की ओर से आयोजित गैर-सरकारी कार्यक्रमों को सरकारी कार्यक्रमों पर लागू प्रतिबंध के समान नहीं माना जाएगा।इसका मतलब है कि निजी शादी समारोह, पारिवारिक आयोजन, व्यक्तिगत कार्यक्रम और अन्य गैर-सरकारी गतिविधियों के संबंध में प्रतिबंध की व्याख्या अलग तरीके से की जाएगी।हालांकि, इस स्पष्टीकरण को राज्य में पहले से लागू अन्य प्लास्टिक नियंत्रण कानूनों से पूरी छूट नहीं माना जा सकता। प्लास्टिक कचरे के निपटान, प्रतिबंधित वस्तुओं और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अन्य नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।
2025 में जारी हुई थी अधिसूचना
हिमाचल प्रदेश सरकार ने 29 मार्च 2025 को छोटी पीईटी पानी की बोतलों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए अधिसूचना जारी की थी।यह अधिसूचना हिमाचल प्रदेश गैर-जैव अपघटनीय कचरा नियंत्रण अधिनियम, 1995 के प्रावधानों के अंतर्गत जारी की गई थी।सरकार ने 1 जून 2025 से प्रतिबंध प्रभावी करने का निर्णय लिया था। इसके लिए सरकारी संस्थाओं और होटल संचालकों को पहले से मौजूद बोतलों के स्टॉक का निपटारा करने के लिए समय दिया गया था।मूल अधिसूचना में सरकारी विभागों के अलावा हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम और निजी होटलों का भी उल्लेख था। इसी कारण निजी होटल संचालकों के लिए प्रतिबंध का वास्तविक दायरा महत्वपूर्ण विषय बन गया था।
पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से उठाया गया कदम
हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल है। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक यहां घूमने पहुंचते हैं।पर्यटन गतिविधियों के कारण होटल, रेस्तरां, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर प्लास्टिक की पानी की बोतलों का व्यापक इस्तेमाल होता है।छोटी प्लास्टिक बोतलें इस्तेमाल के बाद अक्सर कचरे के रूप में फेंक दी जाती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसे कचरे का संग्रह और निपटान विशेष चुनौती बन सकता है।प्लास्टिक कचरा नालियों और जल निकासी व्यवस्था को बाधित कर सकता है। जंगलों, नदियों और पर्यटन स्थलों पर इसके जमा होने से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में छोटी पीईटी बोतलों का उपयोग कम करने की नीति अपनाई थी।
निजी होटल कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण स्पष्टता
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन और होटल उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है।राज्य के शिमला, मनाली, धर्मशाला, कसौली और अन्य पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में निजी होटल और गेस्ट हाउस संचालित होते हैं।इन संस्थानों में पर्यटकों के ठहरने के अलावा शादी समारोह, सम्मेलन और अन्य निजी आयोजन भी होते हैं।छोटी प्लास्टिक पानी की बोतलों पर प्रतिबंध की व्यापक व्याख्या किए जाने से होटल संचालकों के सामने व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती थीं।हाईकोर्ट की ओर से सरकारी और निजी आयोजनों के बीच अंतर स्पष्ट किए जाने से होटल कारोबारियों को नियमों का पालन करने में आसानी होने की उम्मीद है।हालांकि, निजी होटल संचालकों के लिए यह आवश्यक रहेगा कि वे अदालत के लिखित आदेश और पर्यावरण विभाग की लागू अधिसूचनाओं के अनुसार ही व्यवस्था करें।
कांच की बोतल और वाटर डिस्पेंसर को बढ़ावा
राज्य सरकार ने प्लास्टिक कचरा कम करने के लिए विभिन्न विकल्पों के इस्तेमाल पर जोर दिया है।इनमें कांच की बोतलें, स्टील के कंटेनर, पानी के डिस्पेंसर और अन्य दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले संसाधन शामिल हैं।सरकार का मानना है कि सरकारी कार्यक्रमों में ऐसे विकल्प अपनाने से प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद मिलेगी।इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर कचरे का उचित संग्रह और निपटान सुनिश्चित करना भी जरूरी है।पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए केवल प्रतिबंध लगाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाने और टिकाऊ विकल्पों को सुविधाजनक बनाने की भी आवश्यकता होती है।
प्रतिबंध और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन
हाईकोर्ट के स्पष्टीकरण से यह महत्वपूर्ण बात सामने आती है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बनाए गए नियमों को उनके निर्धारित कानूनी दायरे में ही लागू किया जाना चाहिए।सरकारी आयोजनों में छोटी प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल सीमित करने का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। वहीं, निजी गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू करने के लिए स्पष्ट कानूनी आधार होना आवश्यक है।इस मामले में अदालत की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद संबंधित विभागों और होटल संचालकों के लिए नियमों की व्याख्या महत्वपूर्ण होगी।पर्यावरण संरक्षण के प्रयास जारी रखते हुए सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नियमों की जानकारी आम जनता और व्यवसायियों तक स्पष्ट रूप से पहुंचे।
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